महाराष्ट्र मॉडल की राह पर देश! नकली पनीर पर बैन के FSSAI प्रस्ताव पर तुकाराम मुंढे का बयान

FSSAI Analog Paneer Ban: FSSAI ने देश में नॉन-डेयरी और एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाने का ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किया है। इस कदम पर तुकाराम मुंढे ने कहा कि संकट बनने से पहले एक्शन लेना ही सही है।
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तुकाराम मुंढे(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Analog Paneer Ban Proposal Tukaram Mundhe Statement: FDA द्वारा गैर-डेयरी व एनालॉग पनीर के खिलाफ उठाये गए सख्त कदम का असर अब पूरे देश में दिखाई दे रहा है। महाराष्ट्र मॉडल की तर्ज पर FSSAI ने भी गैर-दूध घटकों से बने कृत्रिम पनीर को पनीर नाम से बेचने, प्रचारित करने और लेबल करने पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगाने का मसौदा प्रस्ताव जारी किया है।

FSSAI के इस ऐतिहासिक फैसले पर महाराष्ट्र के सीनियर आईएएस अधिकारी और एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे की बड़ी और कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा के मामले में संकट गहराने से पहले ही कदम उठाना एक प्रभावी नियमन की असली पहचान है।

समस्या का पूर्वानुमान लगाना ही अच्छा प्रशासन

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि संकट बनने से पहले ही कार्रवाई करें। उन्होंने उपभोक्ता हितों की वकालत करते हुए कहा, अच्छा नियमन केवल समस्याओं पर प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि उनका पहले से अनुमान लगाता है।

मुंढे ने बताया कि इसी दूरदर्शी सोच के तहत महाराष्ट्र FDA ने इसी साल जुलाई महीने में ही एनालॉग अथवा नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।

FSSAI द्वारा महाराष्ट्र के इस कदम को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा, महाराष्ट्र ने कार्रवाई की, और अब पूरे भारत के पास इसके लिए एक समान ढांचा उपलब्ध हो सकता है। उपभोक्ताओं के अधिकारों को सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने आगे कहा कि खाद्य पदार्थ की पहचान बेहद मायने रखती है और उपभोक्ताओं को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वे वास्तव में क्या खरीद रहे हैं।

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FSSAI का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन

FSSAI द्वारा जारी भारत के राजपत्र के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री पर प्रतिषेध और निर्बंधन) विनियम, 2011 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे 23 सितंबर 2026 को असाधारण राजपत्र में प्रकाशित किया गया है।

इस नए संशोधन खाद्य सुरक्षा और मानक संशोधन विनियम, 2026 के तहत विनियम 2.1 के उप-विनियम 2.1.1 में एक नया खंड (12) जोड़ा जा रहा है। यह नया खंड स्पष्ट रूप से दूध से व्युत्पन्न घटकों से निर्मित न किए गए पनीर के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाता है।

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नॉन-डेयरी उत्पादों के लिए पनीर नाम के इस्तेमाल पर रोक

एफएसएसएआई के CEO राजित पुनहानी द्वारा जारी इस निर्देश में कहा गया है कि जो उत्पाद वर्तमान में डेयरी संदर्भ में एनालॉग उत्पाद श्रेणी के तहत पंजीकृत या लाइसेंस प्राप्त हैं, वे अब अपने उत्पाद के नाम, लेबलिंग या मार्केटिंग में पनीर शब्द का प्रयोग किसी भी स्थिति में नहीं कर सकेंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और संरचना के बारे में गुमराह होने से बचाना है।

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60 दिनों में मांगी गई आपत्तियां और आगे की राह

FSSAI ने इस ड्राफ्ट रेगुलेशन पर आम जनता, उद्योगपतियों और सभी हितधारकों से 60 दिनों के भीतर सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित की हैं। प्रभावित पक्ष अपनी आपत्तियां मुख्य कार्यकारी अधिकारी, FSSAI, कोटला रोड, नई दिल्ली या आधिकारिक ईमेल regulation@fssai.gov.in पर भेज सकते हैं। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद प्राप्त सुझावों पर विचार कर इस नियम को पूरे देश में अंतिम रूप से लागू कर दिया जाएगा।

महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे की अगुवाई में ली गई इस पहल ने साबित कर दिया है कि उपभोक्ता स्वास्थ्य सुरक्षा के मामले में दूरदर्शी निर्णय पूरे देश के लिए नजीर बन सकते हैं।

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