धामी सरकार के फैसले पर भड़के मुरली मनोहर जोशी! बद्रीनाथ में संगीत कार्यक्रम पर बोले- धाम की पवित्रता पर आघात

Devbhoomi Cultural Festival: बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने बद्रीनाथ में संगीत कार्यक्रम पर आपत्ति जताई है। उन्होंने भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा बताया।
Murli Manohar Joshi On dhami government
संगीत कार्यक्रम पर बोले मुरली मनोहर जोशीसोर्स- सोशल मीडिया
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Murli Manohar Joshi On Devbhoomi Cultural Festival: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और मार्गदर्शक मंडल के सदस्य मुरली मनोहर जोशी ने उत्तराखंड के बद्रीनाथ में हाल में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर आपत्ति जताई है। जोशी ने 25 सितंबर को अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से उत्तराखंड सरकार के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी पवित्र स्थल पर ऐसे संगीत कार्यक्रम की अनुमति देना न केवल सांस्कृतिक मर्यादा का उल्लंघन है बल्कि अपितु धाम की पवित्रता पर भी सीधा आघात है।

देवभूमि की पवित्रता बनाए रखने का आग्रह

मुरली मनोहर जोशी ने केंद्र और उत्तराखंड सरकार से ऐसे कार्यक्रम पर रोक लगाकर देवभूमि की पवित्रता बनाए रखने की मांग की। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के चमोली जिले के बद्रीनाथ शहर में ‘संस्कृति हमारी धरोहर, हमारा भविष्य’ विषय पर दो दिवसीय देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया गया था। जोशी ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य महाराज जी द्वारा इस धाम की स्थापना हिमालयी पर्यावरण मे शांतिपूर्ण तरीके से भगवत भजन के लिए की थी।

शंख बजाना भी मना है

उन्होंने आगे कहा है कि इस जगह पर शंख बजाना भी मना है लेकिन हम उसे भूलकर शोर-शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा तो कर ही रहे हैं, साथ में इतनी ऊंचाई पर हजारों लोगों के नाचने से उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की भी उपेक्षा कर रहे है। जोशी ने कहा कि यह इस बात का प्रतीक है कि अब देवभूमि को बाजारू संस्कृति के रूप में परिणीत किया जा रहा है।

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संस्कृति को बचाने के लिए अनुरोध

मुरली मनोहर जोशी ने भारतीय संस्कृति को मानने वाले लोगों से विशेषकर पूजनीय शंकराचार्यों और महात्माओं से अनुरोध किया है कि वे संस्कृति को बचाने के लिए आवाज उठाए। जोशी ने कहा, “हिमालय देवात्मा है, भगवान शंकर का निवास मां गंगा का उद्गम है इसे नाच ग्रह बनाना करोड़ो भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है।”

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आरएसएस से राजनीति तक का सफर

डॉ मुरली मनोहर जोशी 10 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़ गए थे। उन्होंने राजनीति में पहला कदम साल 1953-54 में रखा था। उस समय उन्होंने गाय बचाओ आंदोलन में भाग लिया था। इतना ही नहीं भारत में आपातकाल के दौरान यानी साल 1975 में मुरली मनोहर जोशी पर मुकदमा भी चला था. वह 7 बार मध्यप्रदेश से लोकसभा के सदस्य रह चुके है। इसके अलावे वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफेसर भी रह चुके हैं। वे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहने के साथ ही केंद्र में शिक्षा मंत्रालय भी संभाल चुके हैं।

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