10% पानी कटौती की तैयारी: राज्य में 15 अक्टूबर 2026 से 31 अगस्त 2027 तक कटौती लागू करने की जानकारी।
रोज 74 MLD की कमी का अनुमान: 740 MLD आपूर्ति के आधार पर शहर को करीब 666 MLD पानी मिलने की संभावना।
पेंच और कन्हान पर निर्भरता: शहर को इन स्रोतों से रोजाना करीब 740 MLD पानी मिलने की जानकारी।
मनीषनगर में चार दिन से परेशानी: नागरिकों ने जलापूर्ति ठप होने की शिकायत की।
आयुक्त ने घबराने से किया इनकार: डॉ. विपिन इटनकर के अनुसार, फिलहाल जलापूर्ति की प्रक्रिया सुचारु है।
Nagpur Water Cut Crisis: नागपुर में 15 अक्टूबर 2026 से 10% पानी कटौती लागू होने की आशंका है। शहर की रोजाना 740 MLD जलापूर्ति के आधार पर करीब 74 MLD पानी कम मिलने का अनुमान है। वहीं, मनीषनगर के नागरिकों ने चार दिन से जलापूर्ति ठप होने की शिकायत करते हुए तत्काल टैंकर और सप्लाई बहाल करने की मांग की है।
शहर में अनियमित जलापूर्ति और कम दबाव की समस्या के बीच अब प्रस्तावित 10% पानी कटौती को लेकर चिंता बढ़ गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जलसंपदा विभाग ने राज्य में 15 अक्टूबर 2026 से 31 अगस्त 2027 तक 10% पानी कटौती की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य बांधों में आपातकालीन जरूरतों के लिए पानी सुरक्षित रखना बताया गया है।
शहर की दैनिक जलापूर्ति करीब 740 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) मानी जाए, तो 10% कटौती का अर्थ रोजाना लगभग 74 MLD पानी कम मिलना है। इस हिसाब से उपलब्ध आपूर्ति करीब 666 MLD रह सकती है। हालांकि, वास्तविक कटौती और अलग-अलग क्षेत्रों में पानी के वितरण को लेकर अंतिम व्यवस्था संबंधित विभागों के निर्णय पर निर्भर करेगी।
नागपुर की जलापूर्ति मुख्य रूप से पेंच बांध और कन्हान नदी पर निर्भर है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पेंच से रोजाना करीब 520 MLD और कन्हान नदी से लगभग 220 MLD पानी शहर को मिलता है। इस तरह कुल आपूर्ति लगभग 740 MLD होती है। कुछ विवरणों में यह मात्रा 750 MLD तक बताई गई है।
शहर में करीब 4.5 लाख अधिकृत नल कनेक्शन हैं। पानी को शुद्ध कर नागरिकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की है। इस बीच रोजाना आपूर्ति किए जाने वाले पानी में से 277 MLD का बिलिंग रिकॉर्ड नहीं होने की बात भी सामने आई है। इससे पानी के वितरण, रिकॉर्ड और बिलिंग व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जलसंपदा विभाग की घोषणा के बाद पालक मंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक में पानी के नियोजन पर निर्णय लिए जाने की जानकारी दी गई है।
मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर के अनुसार, फिलहाल शहर की जलापूर्ति प्रक्रिया सुचारु है और कच्चे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि संबंधित समिति की बैठक के बाद पानी के नियोजन को लेकर निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन के इस बयान के बीच शहर में संभावित कटौती के प्रभाव पर नजर बनी हुई है।
एक ओर संभावित कटौती को लेकर चिंता है, वहीं मनीषनगर समेत कुछ इलाकों के नागरिकों ने पिछले चार दिनों से जलापूर्ति ठप होने की शिकायत की है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, बिना पूर्व सूचना और पानी बहाल होने की स्पष्ट समयसीमा के आपूर्ति बंद होने से परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नागरिकों का कहना है कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए उन्हें भटकना पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री, महापौर और मनपा आयुक्त से शिकायत कर जल्द समाधान की मांग की है।
स्थानीय निवासी प्रियांशु काबरा ने प्रभावित क्षेत्रों में जलापूर्ति तुरंत बहाल करने और सप्लाई पूरी तरह शुरू होने की निश्चित समय-सारणी जारी करने की मांग की है। उन्होंने सामान्य आपूर्ति बहाल होने तक प्रभावित आवासीय क्षेत्रों में मुफ्त पेयजल टैंकर भेजने, मरम्मत कार्य की स्थिति पर आधिकारिक जानकारी देने और देरी के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग भी रखी है।
नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। अब संभावित पानी कटौती के बीच प्रशासन के सामने नियमित आपूर्ति बनाए रखने, शिकायतों का समाधान करने और उपलब्ध पानी का समान वितरण सुनिश्चित करने की चुनौती होगी।