नागपुर विश्वविद्यालय (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

RTMNU में परीक्षा परिणाम का गणित बिगड़ा! 30 दिन बाद भी रिजल्ट नहीं, अधर में लटका छात्रों का भविष्य

RTMNU Result Delay: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में नई सॉफ्टवेयर कंपनी के कारण परीक्षा व परिणाम व्यवस्था गड़बड़ा गई है। शीत सत्र परीक्षाओं के 30 दिन बाद भी परिणाम घोषित नहीं हुए।

आकाश मसने

Nagpur University Exam Result Delay: इन दिनों राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में परीक्षा और परिणाम व्यवस्था अपनी पटरी पर नहीं लौट सकी है। नई साफ्टवेयर कंपनी को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद से व्यवस्था गड़बड़ा गई है। इस बार शीत सत्र परीक्षाएं देर से शुरू हुईं। तभी अनुमान लगाया जा रहा था कि परिणाम भी देरी से आएंगे। अब हकीकत भी सामने आ रही है। 20 जनवरी को परीक्षा शुरू होने से करीब 30 दिन पूरे हो रहे हैं लेकिन अब तक परिणाम की प्रतीक्षा की जा रही है।

45 दिन के भीतर करना होता है परीक्षा परिणाम

नागपुर विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार परीक्षा का परिणाम न्यूनतम 30 दिन के भीतर घोषित होना चाहिए। यदि 30 दिन के भीतर घोषित नहीं हुये तो 45 दिन की समयावधि अधिकतम होती है। इस बार शीत सत्र परीक्षाएं 26 नवंबर से आरंभ हुई थीं। पहले चरण में बैक सब्जेक्ट वालों की परीक्षा ली गई। इन परीक्षाओं की संख्या करीब 200 थी।

बैक सब्जेक्ट होने से विद्यार्थी अधिक नहीं होते। साथ ही 2 विषयों की परीक्षा होती है। इस हालत में परिणाम तेजी से घोषित किये जाने चाहिए लेकिन नई साफ्टवेयर कंपनी को ठेका दिये जाने के बाद से विवि में व्यवस्था ही बिगड़ गई है।

विवि सूत्रों का कहना है कि अगले 10 दिनों के भीतर भी परिणाम घोषित होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। परिणाम तैयार करने और अंक सूची बनाने की प्रक्रिया में वक्त लगता है। परिणाम में देरी का सीधा मतबल छात्रों को अगले सत्र में प्रवेश सहित परीक्षा में भी दिक्कतें आएंगी।

पिछले वर्ष की तुलना में हो रही देरी

पिछले वर्ष शीत सत्र परीक्षा के परिणाम 20 दिनों के भीतर घोषित किये गये थे। उस वक्त परीक्षा विभाग के मुखिया डॉ. कविश्वर थे। इन दिनों परीक्षा विभाग के मुखिया बदल गये हैं। साथ ही साफ्टवेयर कंपनी भी बदल गई है। यही वजह है कि नई व्यवस्था के बाद परीक्षा और परिणाम का ‘गणित’ ही बिगड़ गया है। छात्रों का कहना है कि जब पिछले वर्ष 20 दिन में बैक सब्जेक्ट के परिणाम घोषित किये गये थे, तो इस बार क्यों नहीं किये जा सकते। इसका साफ मतलब है कि विवि की परीक्षा की गाड़ी अब तक पटरी पर नहीं आई है।

परिणाम में देरी का सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा। इससे ग्रीष्म सत्र परीक्षाएं भी देरी से आरंभ होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। ग्रीष्म सत्र परीक्षाओं की शुरुआत प्रमाण पत्र पाठ्यक्रमों से होती है। प्राय: इसकी शुरुआत फरवरी में हो जाती थी, लेकिन इस बार मार्च से भी शुरू होगी या नहीं, अधिकारी भी बताने को तैयार नहीं हैं।

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