Nagpur Justice Rajnish Vyas: कलमेश्वर थाना क्षेत्र अंतर्गत राउलगांव स्थित एसबीएल कंपनी में हुए भीषण विस्फोट मामले में हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। न्यायाधीश रजनीश व्यास ने कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) संजय चौधरी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आलोक चौधरी सहित 5 प्रमुख अधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इस दर्दनाक कारखाने हादसे में 22 महिलाओं सहित कुल 26 बेगुनाह मजदूरों की जान चली गई थी। संजय चौधरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने पैरवी की।
न्या रजनीश व्यास की पीठ ने स्पष्ट किया कि खतरनाक उद्योगों में वैधानिक सुरक्षा नियमों की घोर अनदेखी को सामान्य 'चूक' नहीं माना जा सकता। इसके बाद संजय चौधरी (मैनेजिंग डायरेक्टर), आलोक चौधरी (सीईओ/डायरेक्टर), केदार अरविंद पाचपुत्रे (डिप्टी मैनेजर सेफ्टी), आलोक अवधिया (डायरेक्टर), श्रवण कुमार (डायरेक्टर) को भी जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।
हालांकि अदालत ने कंपनी के 3 स्वतंत्र निदेशकों सत्यवती पराशर, रवींद्र पोखर्णा और मनोज कुमार प्रसाद को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है। सत्यवती पराशर नेअदालतको बताया था कि वह ब्रेस्ट कैंसर (स्टेज-3) से गंभीर रूप से पीड़ित हैं और उनका इम्यून सिस्टम कीमोथेरेपी के कारण बेहद कमजोर हो चुका है। अदालत ने उनकी बीमारी और स्वतंत्र निदेशकों की सीमित कानूनी जवाबदेही (जब तक कि उनकी सीधी मिलीभगत साबित न हो) को ध्यान में रखते हुए उन्हें राहत दी।
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सरकारी वकील ने अदालत में कड़ा विरोध जताते हुए बताया कि 21 जून 2024 को भी DISH विभाग ने कंपनी का निरीक्षण कर सुरक्षा खामियों के संबंध में चेतावनी दी थी, लेकिन प्रबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। आरोपियों पर नई भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 125(a), 125(b) और 288 (विस्फोटक पदार्थों से लापरवाही) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अदालत ने अपने फैसले में बचाव पक्ष की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया कि हादसे के वक्त डायरेक्टर वहां मौजूद नहीं थे या उन्हें इसकी 'जानकारी' नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि खतरनाक रसायनों का व्यवसाय करने वाली कंपनी में वैधानिक ड्यूटी का पालन न करना और पूर्व की चेतावनियों के बावजूद आंखें मूंदे रखना, यह दर्शाता है कि आरोपियों को 'ज्ञान' था कि उनकी इस लापरवाही से किसी की जान जा सकती है।