नागपुर: SBL कंपनी ब्लास्ट के 6 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज, 25 हुई मौतों की संख्या; 3 राज्यों में छापेमारी

Nagpur SBL Company Blast News: नागपुर के राऊलगांव स्थित SBL कंपनी ब्लास्ट मामले में कोर्ट ने 6 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। पुलिस फरार निदेशकों की तलाश में जुटी है।
Nagpur SBL Company Blast: Accused's Bail Rejected; Death Toll Rises to 25
नागपुर के राऊलगांव स्थित SBL कंपनी में हुए ब्लास्ट का दृश्य (सोर्स: सोशल मीडिया)
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SBL Company Blast Case Accused Bail Rejected: महाराष्ट्र के नागपुर जिले में स्थित राऊलगांव की एसबीएल (SBL) कंपनी में हुए भीषण विस्फोट मामले में कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस मामले के 6 मुख्य आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। जमानत याचिका खारिज होने वालों में कंपनी के निदेशक मंडल की सदस्य सत्यवती पाराशर के साथ आलोक अवधिया, अरविंद पाचपुत्रे, श्रवण कुमार, रवींद्र पोखर्णा और मनोजकुमार प्रसाद शामिल हैं।

बढ़ता जा रहा मौत का आंकड़ा

विगत 1 मार्च को हुए SBL कंपनी में हुए इस हृदयविदारक विस्फोट ने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया था। घटना के बाद से ही मृतकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, इस हादसे में जान गंवाने वाले कर्मचारियों की संख्या अब 25 तक पहुंच गई है। कई घायल अब भी जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

कोर्ट में तीखी बहस और पुलिस का विरोध

मंगलवार को जिला व सत्र न्यायाधीश एमआर पुरवार की अदालत में बचाव और पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच लंबी दलीलें चलीं। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता प्रकाश जायसवाल और प्रफुल्ल मोहगांवकर ने पैरवी की। हालांकि, जिला सरकारी वकील नितिन तेलगोटे और अधिवक्ता मैथिली कालविट ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि कंपनी निदेशकों ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी की है। उनकी लापरवाही के कारण ही इतने बड़े स्तर पर जनहानि हुई है। कोर्ट ने पुलिस की दलीलों से सहमत होते हुए माना कि आरोपियों की हिरासत में पूछताछ जरूरी है, इसलिए उन्हें कोई राहत नहीं दी जा सकती।

तीन राज्यों में पुलिस की दबिश

पुलिस ने अब तक इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन मुख्य निदेशक आलोक चौधरी और संजय चौधरी समेत अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। नागपुर ग्रामीण पुलिस की विशेष टीमें महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और एक अन्य राज्य में डेरा डाले हुए हैं। घटना के 9 दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपियों का सुराग न मिलना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।

इस फैसले के बाद अब पुलिस को आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अतिरिक्त बल मिल गया है। मृतकों के परिजनों ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।

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