नागपुर महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

हड़ताल पर गए नागपुर के 250 डॉक्टर्स-नर्सों को भुगतना पड़ेगा खामियाज, 'कारण बताओ' नोटिस के साथ कटेगी सैलरी

NMC Health Workers Strike: नागपुर मनपा के अस्पतालों में हड़ताल करने वाले 250 स्वास्थ्य कर्मियों पर गाज गिरी है। प्रशासन ने 'नो वर्क-नो पे' के तहत वेतन कटौती और कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

आकाश मसने

NMC Health Workers Show Cause Notice: नागपुर महानगरपालिका के नागरिक प्राथमिक आरोग्य केंद्रों (यूपीएचसी) और आरोग्यवर्धिनी केंद्रों में कार्यरत अस्थायी स्वास्थ्य कर्मचारियों ने 9 फरवरी से बंद आंदोलन शुरू किया था। शुरुआत में केवल नर्सों और अन्य कर्मचारियों ने ही हड़ताल में हिस्सा लिया, लेकिन बाद में 51 अर्बन पब्लिक हेल्थ सेंटर्स और अस्पतालों के डॉक्टर्स ने भी इसमें शामिल हो गए थे। जिसकी वहज से नागपुर महानगरपालिका के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई थीं।

नागपुर मनपा के स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यालय और अन्य मनपा के बड़े अस्पतालों से डॉक्टर्स को लगातर स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रखने का प्रयास किया जिसके बाद हड़ताल भी खत्म हो गई। अब प्रशासन ने हड़ताल में शामिल इन नर्सों और डॉक्टर्स के अलावा अन्य कर्मचारियों को मिलाकर लगभग 250 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

‘नो वर्क-नो पे’ का लागू होगा नियम

नागपुर मनपा के स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस हड़ताल में शामिल कुछ कर्मचारियों ने अजीबोगरीब कार्यप्रणाली अपनाई थी। हालांकि सुबह अस्पताल आने के बाद हाजिरी रजिस्टर पर हस्ताक्षर तो किए किंतु सेवाएं देने से इनकार कर दिया जिससे एक तरह से मरीजों के साथ खिलवाड़ हुआ है। इसके लिए अब ‘नो-वर्क, नो पे’ का सिद्धांत लागू किया जा रहा है। हालांकि फिलहाल इन कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सुनवाई का मौका तो दिया जा रहा है किंतु उनके वेतन से कटौती निश्चित ही करने की जानकारी विभाग ने दी।

कर्मचारियों में मचा हड़कंप

उल्लेखनीय है कि गत 2 माह से वेतन नहीं मिलने के कारण मनपा के 51 अर्बन पब्लिक हेल्थ सेंटर्स में से लगभग 33 सेंटर्स पर कार्यरत डॉक्टर्स और नर्सों ने काम बंद कर दिया था। विशेष रूप से ओपीडी बंद हो जाने के कारण प्रति दिन इलाज के लिए आ रहे मरीजों को सेवाएं मिलना बंद हो गया था। हालांकि प्रशासन के स्तर पर हड़ताल खत्म करने का प्रयास तो किया गया किंतु उन्हें सफलता नहीं मिली।

अंतत: नागपुर महापौर द्वारा जिम्मेदारी लिए जाने के बाद हड़ताल स्थगित करने का निर्णय लिया गया। अब हड़ताल खत्म होने के बाद प्रशासन की ओर से कार्रवाई किए जाने से तमाम कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। जानकारों की मानें तो प्रशासन के इस रुख से फिर एक बार स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

इन मांगों को लेकर था विरोध

संगठन के अनुसार, पिछले डेढ़ वर्ष से कर्मचारियों को मानधन (सैलरी) मिलने में 3 से 4 महीने का विलंब हो रहा था। वर्तमान में पिछले नवंबर, दिसंबर और जनवरी 2026 का मानधन बकाया है। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार द्वारा जुलाई 2025 से घोषित 15% मानधन वृद्धि को लागू न करना, परिचारिकाओं (नर्सों) का बकाया प्रोत्साहन भत्ता और लेखपालों के न्यूनतम वेतन का फर्क जैसे मुख्य मुद्दों को लेकर यह आंदोलन किया जा रहा था।

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