नागपुर मनपा, सफाई कर्मचारी बीमा,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर मनपा में गूंजा 'स्वास्थ्य रक्षक' का मुद्दा, सफाई कर्मियों के 5 लाख बीमा में देरी पर हंगामा

Nagpur Sanitation Workers Insurance: नागपुर मनपा में सफाई कर्मचारियों के 5 लाख कैशलेस बीमा में देरी पर हंगामा। उन्हें 'स्वास्थ्य रक्षक' कहने का सुझाव भी सामने आया।

अंकिता पटेल

Nagpur Municipal Corporation: नागपुर महानगर पालिका की आम सभा में सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा और सुरक्षा का मुद्दा जोरों से गूंजा। कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने वाले इन कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित 5 लाख रुपये के कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना में हो रही देरी पर नगरसेवकों ने कड़ा ऐतराज जताया। इसके साथ ही सदन में इन कर्मचारियों के सम्मान में उन्हें 'सफाई कर्मचारी' की जगह 'स्वास्थ्य रक्षक' कहकर संबोधित करने का सुझाव भी दिया गया।

बीमा प्रक्रिया में देरी और कवर 10 लाख करने की मांग

नगरसेवक लखन येरावार ने प्रशासन से सवाल किया कि 5 लाख की कैशलेस पॉलिसी को लागू करने की प्रक्रिया में एक साल का समय क्यों लग गया? इसके जवाब में प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दीपक सेलोकर द्वारा बताया गया कि अब तक लगभग 60% कर्मचारियों का डेटा आ चुका है, जिसमें कर्मचारी और उनके परिवार (कुल 5 लोग) को मिलाकर करीब 25,000 लाभार्थियों का आंकड़ा सामने आया है।

फिलहाल, मनपा हर साल मेडिकल बिलों के भुगतान पर लगभग 14 करोड़ रुपये खर्च करती है। जब बीमा कंपनियों से कैशलेस पॉलिसी का अनुमान मांगा गया, तो एक कंपनी ने 43 करोड़ रुपये का खर्च बताया है।

वहीं सदन में मौजूद पार्षद अभिषेक शंभरकर ने बढ़ती महंगाई का हवाला देते हुए 5 लाख के बीमा को नाकाफी चताया और इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की पुरजोर मांग की। इसके अलावा सत्ता पक्ष और विपक्ष के नगरसेवकों को भी इस पॉलिसी का लाभदिए जाने का प्रस्ताव रखा गया।

सुरक्षा मानकों का उल्लंघन सदन में अभिजीत झा ने कर्मचारियों की सुरक्षा का अत्यंत गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि 2013 के अधिनियम का खुला उल्लंघन करते हुए आज भी कर्मचारियों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण (सेफ्टी नॉम्र्स) के सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए उतारा जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राउंड लेवल पर सफाई विभाग द्वारा कर्मचारियों को अनिवार्य मास्क और जूते जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जा रही हैं। इस मामले पर सदस्यों ने संबंधित अधिकारियों पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की।

आयुक्त का आश्वासन, 15-20 दिनों में लिया जाएगा ठोस निर्णय

महापौर ने इस विषय की गंभीरता को स्वीकार करते हुए प्रशासन को जल्द से जल्द कार्रवाई करने और कर्मचारियों को उचित स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के निर्देश दिए। आयुक्त ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रशासन प्रीमियम के भारी भरकम खर्च को कम करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर काम कर रहा है।

इसमें उन बैंको से रियायती दरों पर बीमा के लिए बात करना शामिल है, जहां नगर निगम की जमा राशि रखी गई है। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की इस पॉलिसी से जोड़ने पर भी विचार किया जा रहा है।

आयुक्त ने बताया कि छत्रपति संभाजी नगर और पिंपरी-चिंचवड नगर निगमों द्वारा उठाए गए कदमों का अध्ययन कर अगले 15-20 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाएगा ताकि मनपा पर कम वितीय भार पड़े और कर्मचारियों को इसका अधिक से अधिक लाभ मिल सके।

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