Nagpur Athletes Zone Championship Gold: नागपुर जिले में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार करने के दावे के साथ चल रही 'विभागीय मिशन लक्ष्यवेध' योजना में खिलाड़ियों की सुविधाओं को लेकर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
गोवा में 27 से 29 सितंबर तक हुई 37वीं वेस्ट जोन चैम्पियनशिप में नागपुर के खिलाड़ियों को सीमित बजट और लंबी यात्रा के बीच प्रतियोगिता में उत्तरना पड़ा।
हालात यह रहे कि नागपुर से करीब 1,100 किमी दूर मिरज में खिलाड़ियों को अगली ट्रेन के लिए 13 घंटे इंतजार करना पड़ा और प्रतियोगिता खत्म होने से पहले ही होटल खाली करना पड़ा। इसके बावजूद खिलाड़ियों ने हौसला नहीं छोड़ा और स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की।
राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पदक जीतने बाली हाई जंप खिलाड़ी संचिता मालेवार और भाला फेंक खिलाड़ी मनोज चव्हाण का चयन वेस्ट जोन चैम्पियनशिप के लिए हुआ था। विभागीय उपसंचालक महादेव कासगावड़े ने दोनों खिलाड़ियों और कोच के लिए थर्ड एसी की यात्रा की व्यवस्था कराई, टिकट नागपुर जिले से मिरज (1178) किमी) और फिर मिरज से मडगांव (306 किमी) की थी।
25 सितंबर को मिरज पहुंचने के बाद खिलाड़ियों और कोच को सुबह 9.30 से रात 10.45 बजे तक अगली ट्रेन का इंतजार करना पड़ा, करीब 13 घंटे का यह इंतजार खिलाड़ियों की यात्रा को और धकाऊ बना गया। इवेंट शाम 4 बजे, सुबह 11 बजे होटल से चेकआउटः सबसे बड़ा सवाल संचिता के इवेंट को लेकर सामने आया। हाई जंप का इवेंट अंतिम दिन शाम 4 बजे था लेकिन टीम को सुबह करीब 11 बजे होटल खाली करना पड़ा।
इससे पहले सुबह के समय संचिता ने उपसंचालक से कॉल करके कहा भी कि हमें रहने दीजिए तो अफसर ने सख्त लहजे में कह दिया कि अपने स्तर पर मैनेज कीजिए, बाद में देख लेंगे, चेकआउट के बाद खिलाड़ी और कोच सामान लेकर स्टेडियम पहुंचे और वहीं दिन बिताया। शाम को संचिता ने 1.45 मी. छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता।
इससे एक दिन पहले मनोज चव्हाण ने 63.06 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। यानी सुविधाओं और आराम की कमी के बावजूद दोनों ने अपनी क्षमता साबित की। खिलाड़ियों ने सफलता का श्रेय कोच इशिता रॉय के मार्गदर्शन को दिया। मामले को लेकर उपसंचालक ने कहा कि हमने हवाई सफर का प्रयास किया था। यदि खर्च ज्यादा हुआ है तो उन्हें बाकी राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
बता दें कि मिशन लक्ष्यवेध के खिलाड़ियों के लिए कुछ समय पूर्व तक उपकरण भी उपलब्ध नहीं करवाए गए थे। भाला फेंक खिलाड़ी मनोज चव्हाण फटे स्पाइक से और संचिता बिना स्पाइक के तैयारी कर रही थी। डेरवण में आयोजित स्टेट चैम्पियनशिप के बाद नवभारत ने खिलाड़ियों की सुविधा को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया। जिसके बाद विभाग हरकत में आया और वेस्ट जोन चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों आवश्यक स्पाइक की सुविधा उपलब्ध करवाई गई।
2 खिलाड़ियों और एक कोब के लिए विभाग की ओर से करीब 25,000 रुपए स्वीकृत किए गए थे, इसी राशि में होटल, भोजन, नाश्ता और स्टेडियम तक आने-जाने सहित अन्य खर्च शामिल था। टीम के अनुसार, खर्च को कम से कम रखने के बावजूद करीब 33 से 35 हजार रुपए खर्च हुए। अतिरिक्त राशि की प्रतिपूर्ति होगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
एथलेटिक्स के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एवं जिला संघ के सचिव डॉ. शरद सूर्यवंशी के अनुसार, मिशन लक्ष्यवेध के खिलाड़ियों के लिए व्यवस्था पूरी तरह एथलीट केंद्रित होनी चाहिए, लंबी दूरी की यात्रा में जरूरत के अनुसार ट्रेन के बजाय विमान से यात्रा की सुविधा दी जा सकती है जिससे खिलाड़ियों का समय और ऊर्जा बच सके।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता से पहले पर्याप्त आराम, एसी कमरे, पौष्टिक भोजन और सुविधाजनक परिवहन जरूरी है। इवेंट से कई घंटे पहले खिलाड़ियों को स्टेडियम में बैठाने के बजाय उन्हें कमरे में आराम और मानसिक तैयारी का अवसर मिलना चाहिए।
प्रतियोगिता के बाद भी रिकवरी के लिए पर्याप्त आराम, गर्म पानी और बार्क से उपचार जैसी सुविधाएं जरूरी है। सूर्यवंशी ने कहा कि मिशन लक्ष्यवेध में सरकार भविष्य के उच्च स्तरीय और संभावित ओलंपिक खिलाड़ियों को तैयार कर रही है। ऐसे में खिलाडियों को सामान्य व्यवस्था नहीं बल्कि भविश्य के चैम्पियन के अनुरूप सुविधाएं और वातावरण मिलना चाहिए।