District Planning Committee Nagpur: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिला वार्षिक योजना के तहत नागपुर जिले के लिए 1,850 करोड़ रुपयों की मांग का प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन सरकार ने केवल 1,021 करोड़ रुपयों को ही मंजूर किया। कुल मांग में से 829 करोड़ रुपये उपराजधानी को कम मिले हैं। आशा यह जताई जा रही थी कि सीएम अपने गृह जिले को बीते वर्ष की तुलना में अधिक निधि देंगे लेकिन बीते वर्ष से भी 26 करोड़ रुपये कम मिले हैं।
पिछले वर्ष 2025-26 में 1,047 करोड़ की निधि मंजूर की गई थी। समझा जा रहा है कि राज्य की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सभी जिलों की निधि में कटौती की गई है। हालांकि पुणे को सर्वाधित 1,300 करोड़ रुपये और मुंबई उपनगर को 1,105 करोड़ दिये गये हैं। तीसरे स्थान पर नागपुर को रखा गया है। सीएम ही वित्त मंत्रालय भी देख रहे हैं जिसके चलते नागपुर जिले के लिए कटौती समझ से परे बताई जा रही है।
बता दें कि राज्य के बजट में जिलेवार योजनाओं के लिए निधि का प्रावधान किया जाता है। जिले की जनसंख्या, भौगोलिक क्षेत्र और आदिवासी क्षेत्र जैसे विभिन्न मानदंड देखे जाते हैं। पालक मंत्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर जिलेवार नियोजन किया जाता है। फिर वित्त मंत्री की अध्यक्षता में समिति इस योजना पर विचार करती है और अंतिम रूप देती है। चालू वित्तीय वर्ष हेतु बजट में डीपीसी के लिए 21,867 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जो बीते वर्ष 2025-26 के लिए 20,165 करोड़ रुपये था। इस वर्ष के लिए 1,702 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
राज्य पर बढ़ते कर्ज के बोझ के साथ-साथ विभिन्न योजनाओं के लिए धन की आवश्यकता को देखते हुए 2026-27 के आर्थिक वर्ष में डीपीसी निधि में और कटौती होने की संभावना व्यक्त की जा रही थी। दिवंगत वित्त और नियोजन मंत्री अजीत पवार ने जिलों के वार्षिक योजनाओं को तैयार करते समय प्रशासन को कुछ सुझाव दिए थे।
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मुख्यमंत्री फडणवीस इस बारे में अधिक स्पष्ट हैं और उन्हें राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति का पूरा अंदाजा है। पवार की योजना को उनका समर्थन भी प्राप्त था। राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए उनके प्रयास रहे हैं। इसलिए राज्य के सभी जिलों से भेजी गईं योजनाओं का अध्ययन कर डीपीसी निधि के वितरण में थोड़ी कटौती की गई है।
जिले को 2025-26 के आर्थिक वर्ष में 1,047 करोड़ रुपये मिले थे। इनमें से कितने प्रतिशत का खर्च हुआ, इसका आकलन प्रशासनिक स्तर पर किया गया था। योजनानुसार निधि की मांग की गई थी और यह भी देखा गया कि उस पर कितना खर्च हुआ।
जिले ने इस बार 1,850 करोड़ की मांग की थी, जो पिछले आर्थिक वर्ष से 803 करोड़ अधिक थी। डीपीसी निधि से जिले में होने वाले विकास कार्यों और योजनाओं के लिए वार्षिक योजना में कितनी राशि निर्धारित की गई और उसका कितना खर्च हुआ, यह देखने के बाद सरकार ने निधि के संदर्भ में निर्णय लिया।