Nagpur DBA Elections Lawyers Voting: नागपुर जिला वकील संघ (डीबीए) के चुनाव वकीलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय होता है। इस बार भी रोमांचक मुकाबला देखने मिलने वाला है क्योंकि उम्मीदवारों ने मतदाता वकीलों को रिझाने और अपने पक्ष में करने के लिए जी तोड़ मेहनत की है। शुक्रवार को होने वाले मतदान के लिए अब केवल कुछ ही घंटे शेष रह गए हैं। ऐसे में अध्यक्ष और सचिव दोनों पदों के लिए मुकाबला कड़ा होता जा रहा है। कहीं छोटी तो कहीं बड़ी बैठक हो रही है।
वैसे वकीलों की मानें तो इस बार चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए डीबीए के पूर्व अध्यक्ष अधि. प्रकाश जायसवाल और पूर्व सचिव अधि. नितिन देशमुख के बीच सीधी टक्कर है। इनके अलावा पूर्व सचिव अधि। मनोज साबले के साथ अधि। राजेश नायक, अधि. तरुण परमार और अधि। सुनील लाचरकर भी अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मैदान में उतरे हैं।
वहीं सचिव पद के लिए त्रिकोणीय लड़ाई होने वाली है। अधि। अमित बंड, अधि। अनिल गुल्हाने और अधि। आशीष शेंडे के बीच कड़ा मुकाबला होने वाला है। हालाकि अधि. नितिन रुड़े और अधि. आशीष कटारिया भी पूरा जोर लगा रहे हैं। शुक्रवार को मतदान संपन्न होने के बाद अगले दिन शनिवार को मतगणना की जाएगी और उसी दिन चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
इस तरह की चुनावी टक्कर में अक्सर दोपहर 3 बजे के बाद अचानक समीकरण बदल जाते हैं। अध्यक्ष और सचिव पद के उम्मीदवारों के बीच अंतिम समय में गुप्त गठबंधन होने की संभावना बनी रहती है। इन संभावित गठबंधनों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार दोपहर 3 बजे तक अपने पास कुछ 'सुरक्षित वोट' संभालकर रखते हैं, ताकि बातचीत के दौरान उनकी स्थिति मजबूत बनी रहे।
इस बार जानकारी मिल रही है कि कई उम्मीदवार अपने पास करीब 200 से 250 वोट सुरक्षित रखे हुए हैं और यही वोट निर्णायक साबित होंगे। यदि मुकाबला बेहद कड़ा हुआ तो अंतिम समय में कुछ उम्मीदवारों के बीच गुप्त गठबंधन बन सकते हैं जिससे चुनाव का पूरा परिदृश्य अचानक बदल सकता है और रोमांच और बढ़ सकता है।
चुनाव अब पूरी तरह रंग पकड़ चुका है और राजनीतिक माहौल गरमा गया है। केवल डीबीए स्तर पर ही नहीं नागपुर जिला वकील संघ का चुनाव राजनीतिक रूप से भी काफी गहमा-गहमी वाला होता है। राजनीतिक पार्टियों की अपनी आघाड़ियां इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। चुनाव को महज कुछ घंटे बचे होने के कारण गेट-टूगेदर की होड़ लग गई है।
पार्टियों का दौरतो पहले से ही शुरू हो गया था लेकिन गुरुवार को उम्मीदवारों ने वोटरों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग लॉन और बैंक्वेट हॉल में स्नेह मिलन आयोजित किया। मजबूत स्थिति बनाए रखने के लिए पहले से 'वोट बैंक' तैयार रखना अहम माना जाता है। इस बार' वन बार, वन वोट' नियम लागू होने के कारण लगभग 1,300 वोट कम हो गए हैं जिससे कुल मतदाताओं की संख्या घट गई है। ऐसे में अंतिम समय की रणनीति और भी महत्वपूर्ण हो गई है।