पार्षदों ने प्रशासन की जमकर खिंचाई की  प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
नागपुर

नागपुर मनपा की सभा में बवाल, डिजिटल वर्क्स मॉड्यूल पर भड़के पार्षद, महापौर ने दिए सख्त निर्देश

Nagpur Municipal Corporation: नागपुर मनपा की आम सभा में नए ऑनलाइन वर्क्स मॉड्यूल प्रणाली को लेकर हंगामा हुआ। पार्षदों के विरोध के बाद महापौर ने फाइलों की समयसीमा तय करने के आदेश दिए।

प्रमोद यादव

Digital Works Module NMC: नागपुर महानगरपालिका की आम सभा में नए डिजिटल 'वर्क्स मॉड्यूल' प्रणाली को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने प्रशासन की जमकर खिंचाई की।

पार्षदों का आरोप था कि विकास कार्यों में तेजी और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह ऑनलाइन सिस्टम विकास की राह में बाधा बन गया है। वाडों के विकास कार्यों से जुड़ी फाइलें जूनियर इंजीनियर, उप अभियंता और कार्यकारी अभियंताओं के टेबल पर हफ्तों तक अटकी रहती हैं।

इस मामले में तीखी बहस के बाद महापौर ने प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए हर स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही और फाइलों के निपटारे की समयसीमा तय करने का आदेश दिया। विपक्ष के नेता संजय महाकालकर ने आम सभा में नोटिस के माध्यम से महत्वपूर्ण विषय सदन में रखा।

आयुक्त मुरुगानंथम ने स्पष्ट किया प्रणाली में तेजी से हो रहा सुधार

सदन में उठे सवालों का जवाब देते हुए अतिरिक्त आयुक्त मुरुगानंथम ने स्पष्ट किया कि वर्क्स मॉड्यूल के लिए किसी नई एजेंसी को अलग से भुगतान नहीं किया गया है।

वर्ष 2023 से 2029 तक नागपुर मनपा के संपूर्ण आईटी और सॉफ्टवेयर रखरखाव के लिए जो करार हुआ है उसी के तहत यह मॉड्यूल तैयार हुआ है।

अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती एक महीना कर्मचारियों के प्रशिक्षण में बीता। वाटर वर्क्स जैसे विभागों में लाखों आइटम होने के कारण तकनीकी दिक्कतें आईं जिन्हें अब लगभग ठीक कर लिया गया है।

वर्क ऑर्डर तक की तय हो गारंटी

चर्चा के दौरान सदस्यों ने जोर देकर कहा कि 160 पार्षदों - के प्रभागों में सीवरलाइन, चैंबर और गटर जैसे आपातकालीन विकास कार्य फाइलों की देरी के चलते रुके हुए हैं। पार्षदों ने मांग रखी कि जेई से लेकर अतिरिक्त आयुक्त तक, हर अधिकारी के पास फाइल - रुकने की अधिकतम मियाद तय की जाए।

यदि समय पर फाइल आगे नहीं बढ़ती तो सिस्टम में ऑटो-एस्केलेशन की सुविधा हो। पार्षदों को फाइलों की रियल टाइम ट्रैकिंग के लिए टैब और जरूरी डिजिटल उपकरण शीघ्र उपलब्ध कराए जाए।

महापौर नीता ठाकरे ने बोला लापरवाही बर्दाश्त नहीं

बहस के अंत में महापौर नीता ठाकरे ने पार्षदों की चिताओं को जायज ठहराते हुए आयुक्त और प्रशासन को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नई तकनीक व्यवस्था को आसान बनाने के लिए है, न कि जनता के काम रोकने के लिए, किस स्तर (JE। उप अभियंता, EE, SE, चीफ इंजीनियर आदि) पर फाइल कितने दिन रुकेगी, इसका स्पष्ट परिपत्र तुरंत जारी किया जाए। बेवजह फाइल पेंडिंग रखने वाले अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।

ऑफलाइन ही बेहतर था ऑनलाइन और बढ़ा चक्कर

सदन में चर्चा की शुरुआत हुए महाकालकर ने कहा कि वर्क्स मॉड्यूल लागू होने के बाद विकास कार्यों की गति धीमी हो गई है।

नेहरूनगर सहित विभिन्न जोनों का उदाहरण देते हुए बताया कि एक ही फाइल दर, साइट विजिट या स्टैंडर्ड फॉर्मेंट में मामूली अंतर का हवाला देकर 2-3 बार वापस लौटा दी जाती है। जोनों में तैनात सहायक आयुक्त और कार्यकारी अभियंता फाइलों को आगे बढ़ाने में लापरवाही बरत रहे हैं।

10 अगस्त को दिए गए प्रस्तावों को सितंबर तक प्रशासनिक मान्यता नहीं मिल पा रही है। पार्षद अभिजीत झा ने मांग की कि जब एनएमसी ई-गवर्नेस पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है तो अधिकारियों के लिए अधिकतम 24 घंटे या निश्चित समयावधि का नियम अनिवार्य क्यों नहीं किया जा रहा?

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