विदर्भ की अदालतों की खुली पोल, High Court जजों का सर्प्राइज दौरा, 48 घंटे में 86 तहसीलों की जांच

Bombay High Court Nagpur Bench: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने 48 घंटे में विदर्भ के 10 जिलों की 86 तहसील अदालतों का औचक निरीक्षण कर बुनियादी ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
Vidarbha Courts Inspection Justice Anil Kilor
न्यायाधीश अनिल किलोर फोटो सोर्स- नवभारत
Published on
Updated on

Vidarbha Courts Inspection Justice Anil Kilor: विदर्भ के आम नागरिक न्याय पाने के लिए जिस न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाता है। उसी न्याय व्यवस्था की जमीनी स्थिति जानने के लिए हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने हाल ही में अनोखी पहल की है।

नागपुर बेंच के प्रशासनिक न्यायाधीश अनिल किलोर के नेतृत्व में महज 48 घंटे के भीतर विदर्भ के 10 जिलों के 86 तहसीलों में स्थित न्यायालयों की प्रत्यक्ष पड़ताल की गई। इस दौरान जिलों की न्याविक अदालतों की इमारतों से लेकर जमीनी हकीकत न्यायाधीशों के कार्यालय, परखी 10 व्यवस्था की कर्मचारियों की सुविधाएं, आवास और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया।

12 और 13 सितंबर को चलाए गए इस व्यापक निरीक्षण अभियान को नागपुर बेंच के इतिहास की अपनी तरह की पहली बड़ी पहल बताया जा रहा है। खास बात यह रही कि न्यायालयों की स्थिति जानने के लिए केवल सरकारी रिपोर्ट या कागजी रिकॉर्ड पर निर्भर रहने के बजाय न्यायमूर्ति और संबंधित अधिकारी खुद तहसील स्तर तक पहुंचे।

अनिल किलोर जमीनी हकीकत जानने पर जोर

इस अभियान का उद्देश्य तहसील स्तर की न्यायिक व्यवस्था के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं को समझना था। निरीक्षण के दौरान न्यायाधीशों, न्यायालयीन अधिकारियों, वकील संघों के प्रतिनिधियों, स्थानीय प्रशासन तथा सार्वजनिक निर्माण विभाग के अभियंताओं से चर्चा की गई।

नागपुर बेंच के प्रशासनिक प्रबंधक भूषण क्षीरसागर मौसम : तापमान में हो रही के अनुसार तहसील स्तर की अदालतों की स्थिति का वास्तविक आकलन केवल कागजी रिपोटों के आधार पर नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष निरीक्षण के माध्यम से किया जाना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य था।

अनिल किलोर न्यायालयों का निरीक्षण किया

नागपुर को छोड़कर विदर्भ के 10 जिलों के लिए नागपुर बैच के 10 न्यायाधीश पालक न्यायमूर्ति के रूप में जिम्मेदारी संभालते हैं। अभियान के दौरान इन सभी न्यायमूर्तियों ने अपने-अपने जिलों की विभिन्न तहसीलों में जाकर न्यायालयों का निरीक्षण किया।

वहीं प्रशासनिक न्यायाधीश अनिल किलोर ने लाखनी, वडसा और हिंगणा सहित विभिन्न क्षेत्रों के चयनित तहसील न्यायालयों का दौरा किया। इस प्रत्यक्ष निरीक्षण से तहसील न्यायालयों की वास्तविक स्थिति और स्थानीय स्तर पर आने वाली समस्याओं को समझने का प्रयास किया गया।

न्यायाधीशों के आवास से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक की जांच

नागपुर बेंच के प्रशासनिक न्यायाधीश अनिल किलोर निरीक्षण के दौरान अदालतों की इमारतों की मौजूदा स्थिति, न्यायाधीशों के कार्यालय, कर्मचारियों के लिए उपलब्ध सुविधाएं तथा न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के आवास की स्थिति की भी पड़ताल की गई।

इसके अलावा अदालत परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को भी निरीक्षण के दायरे में रखा गया। इन सभी पहलुओं का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया गया। इसी आधार पर भविष्य में न्यायालयों के लिए आवश्यक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विकास की योजना तैयार किए जाने की संभावना है।

राष्ट्रीय लोक अदालत के साथ दोहरा उद्देश्य

यह अभियान 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान ही संचालित किया गया। इससे निरीक्षण के साथ-साथ लंबित मामलों के निपटारे और स्थानीय न्यायालयों की कार्यप्रणाली को लेकर मार्गदर्शन का काम भी हुआ।

लोक अदालत के दौरान स्थानीय स्तर पर सामने आई तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं का मौके पर ही समाधान करने का प्रयास किया गया। संबंधित न्यायिक अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया गया।

Vidarbha Courts Inspection Justice Anil Kilor
MPSC परीक्षा प्रणाली पर भड़के छात्र, समिति के सामने रखी 23 मांगें, ऑनलाइन एग्जाम रद्द करने की मांग

नागपुर बेंच में 67 मामले निपटे

उच्च न्यायालय की विधि सेवा उपसमिति के अनुसार, राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान नागपुर बैंच में कुल 67 लंबित मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। इन मामलों में समझौते के माध्यम से कुल 83.5 करोड़ रुपये की राशि का सेटलमेंट हुआ।

इस तरह 48 घंटे के इस अभियान में एक ओर जहां विदर्भ के तहसील न्यायालयों की बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति सामने आयी वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से लंबित मामलों के निपटारे को भी गति मिली।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com