Nagpur Municipal Corporation: नागपुर महानगरपालिका में लगभग 4 वर्षों तक रहे प्रशासक राज को लेकर सत्तापक्ष भाजपा इस कार्यकाल के निर्णयों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए दिखाई देती हो लेकिन सत्ता में आने के बाद से ही सत्तादल के कई सदस्य पार्षदों की कार्यप्रणाली विवादों के घेरे में है।
नागपुर महानगरपालिका में लगभग सभी पदों पर महिलाओं की नियुक्ति करते समय सत्तापक्ष की ओर से मनपा में अनुशासन होने की आशा जताई जा रही थी किंतु अब इसके उलट होता दिखाई दे रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई मायनों में सुर्खियों में रहीं मनपा की शिक्षण सभापति लड्डा एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं।
बताया जाता है कि शिक्षण सभापति शासकीय वाहन में महाराष्ट्र शासन का बोर्ड लगाकर दौरा कर रही थीं। इसकी भनक लगते ही मनपा के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से कार्रवाई कर यह बोर्ड निकाल दिया गया। सूत्रों की मानें तो मनपा में कई सभापति स्वयं को किसी मंत्री से कम नहीं समझ रहे हैं। यही कारण है कि उनके विभाग अंतर्गत होने वाले विकास कार्यों की फाइलें उनसे होकर जाने की हिदायतें प्रशासन को दी गई।
उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया रील तैयार करने के लिए अपने भाषण का केवल 10 सेकंड का वीडियो मांगा था। इसे म्यूट करके इस्तेमाल किया जाना था।
शुरुआत में विभाग ने वीडियो देने की सहमति दी लेकिन 2 दिन बाद यह कहकर मना कर दिया गया कि सदन के नियमों के अनुसार फुटेज बाहर नहीं दी जा सकती और इससे विभाग मुश्किल में पड़ सकता है।
यदि नियम सदन की कार्यवाही को बाहर नहीं भेजने का है तो फिर लड्डा जैसे नेताओं के पूरे पूरे भाषण कैसे उपलब्ध कराए गए और वे सोशल मीडिया पर कैसे प्रसारित हो रहे हैं?
हाल ही में हुई नागपुर महानगरपालिका की सभा में कांग्रेस के पार्षद वसीम खान द्वारा शिक्षा विभाग से संबंधित एक प्रश्न पूछा गया था। नियमों के अनुसार केवल प्रशासन द्वारा ही जवाब दिया जाना चाहिए था किंतु शिक्षण सभापति लड्डा ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए जवाब देना शुरू कर दिया।
इसे लेकर भले ही आश्चर्य जताया गया हो लेकिन मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब उन्होंने इसकी रिकॉर्डिंग सोशल मिडीया पर डाल दी। नियमों के अनुसार यह भी स्वीकार्य नहीं है किंतु नियमों को ताक पर रखकर पूरी कार्यप्रणाली जारी होने से अब सत्तापक्ष कटघरे में है।
सदन की बैठकों की रिकॉर्डिंग और वीडियो फुटेज उपलब्ध कराने को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। वसीम खान ने प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का सीधा आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि जहां एक और सत्तापक्ष और चुनिंदा नेताओं के पूरे पूरे भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कराए जा रहे हैं वहीं अन्य सदस्यों को सोशल मीडिया रील्स के लिए महज 10 सेकंड का म्यूट फुटेज तक देने से नियमों का हवाला देकर मना किया जा रहा है।