200 करोड़ का फंड, फिर भी काम बंद! नागपुर महानगरपालिका में फाइलों की मंजूरी पर उठे सवाल

Nagpur Municipal Corporation: नागपुर मनपा के 10 जोनों में 200 करोड़ के विकास कार्यों की फाइलें मंजूरी के इंतजार में अटकी हैं। आचार संहिता और बजट कटौती से काम प्रभावित होने की आशंका है।
 Nagpur Municipal Corporation  Development Fund
नागपुर महानगरपालिकासोर्स- सोशल मीडिया
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Nagpur Municipal Corporation  Development Fund: नागपुर महानगरपालिका में विकास कार्यों पर प्रशासनिक लापरवाही भारी पड़ती दिखाई दे रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शहर के सभी 10 जोनों के लिए स्वीकृत 200 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की फाइलें लंबे समय से मंजूरी की प्रतीक्षा में धूल खा रही हैं।

चालू वित्तीय वर्ष के 8 माह बीत चुके हैं और शेष 4 महीनों में काम पूरा कराने का भारी दबाव है। इस देरी के चलते शहर के 38 प्रभागों में बुनियादी विकास कार्य ठप पड़े हैं जिससे सत्ता पक्ष समेत सभी पार्षदों में भारी नाराजगी और चिंता का माहौल है।

नागरिक सुविधाओं के लिए स्थायी समिति ने प्रत्येक जोन को 20-20 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। जोन अध्यक्षों की बैठकों में पार्षदों द्वारा सुझाए गए प्रस्तावों को मंजूरी देकर मुख्यालय भेजा गया था। सूत्रों के अनुसार फाइलों का यह अंबार जोनल सहायक आयुक्त, कार्यकारी अभियंता और उप-अभियंताओं के स्तर पर तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृतियों के फेर में फंसा हुआ है।

आचार संहिता और बजट कटौती का दोहरा संकट

दिसंबर माह में मनपा आयुक्त द्वारा संशोधित बजट पेश किए जाने की संभावना है। प्रावधानों और वास्तविक राजस्व में अंतर आने पर फंड कटौती की तलवार लटक सकती है। इसके अलावा आगामी विधान परिषद शिक्षक

निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के मद्देनजर करीब 45 दिनों की आचार संहिता लगने का अनुमान है। यदि आचार संहिता प्रभावी हो गई तो निविदा आवंटन और नई स्वीकृतियों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी जिससे काम कराने की वास्तविक मियाद सिमटकर नाममात्र रह जाएगी।


क्या मंजूरी से पहले ही करा दिए गए काम

इस पूरे प्रकरण में एक चौकाने वाला पहलू भी सामने आ रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि फाइलों को औपचारिक प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी मिलने से पहले ही कुछ पार्षदों ने अपने प्रभागों में काम शुरू करवा दिए।

आरोप है कि कई जगहों पर बिना निविदा और अनिवार्य कोटेशन प्रक्रिया के ही काम पूरे भी कर लिए गए हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि प्रशासनिक मंजूरी से पहले नियमों को ताक पर रखकर काम किए गए है तो इन अनियमितताओं का जिम्मेदार कौन होगा?

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सत्ता पक्ष नेता ने अधिकारियों को लगाई फटकार

नागपुर महानगरपालिका में विकास कार्यों पर प्रशासनिक लापरवाही से फाइलों के अटके होने और जनप्रतिनिधियों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए सत्ता पक्ष नेता बाल्या बोरकर ने मनपा के वरिष्ठ तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई।

बोरकर ने कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अधिकारियों को लंबित प्रस्तावों की जांच और तकनीकी स्वीकृति तत्काल पूरी कर फाइलों को अंतिम मंजूरी के लिए आगे बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए।

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