जुकाम से बच्चों की मौत (AI Generated Photo) 
नागपुर

Alert! नागपुर में ‘जुकाम’ से 15 से ज्यादा बच्चों की मौत, जांच के लिए पुणे की लैब में भेजे गए नमूने

Children Die of Cold: नागपुर में जुकाम इतना ज्यादा खतरनाक हो चुका है कि इससे 15 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसके नमूनों को टेस्ट के लिए पुणे की लैब में भेजा गया।

प्रिया जैस

Nagpur News: इन दिनों सिटी के विविध सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में जुकाम से संबंधित मरीजों की संख्या बढ़ी है। इनमें बच्चों की संख्या अधिक है। बीमारी से जुड़े सभी नमूनों को पुणे की राष्ट्रीय प्रयोगशाला में भेजा गया है। ल‌क्षण के आधार पर डॉक्टर इसे ‘मस्तिष्क ज्वर’ मान रहे हैं लेकिन प्रशासन का दावा है कि जब तक बीमारी की पुष्टि नहीं होती तब तक स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।

अकेले मेडिकल में अब तक 6 बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं एम्स में 3 व अन्य अस्पतालों में 6 से अधिक बच्चों की मौत की जानकारी मिली है। यह सभी बच्चे मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के हैं। सिटी में करीब महीनेभर से जुकाम से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ी है। मस्तिष्क ज्वर (दिमागी बुखार) इंसेफेलाइटिस या मेनिन्जाइटिस के कारण होने वाली मस्तिष्क की सूजन है जिसके मुख्य लक्षणों में सिरदर्द, तेज बुखार, गर्दन की जकड़न, भ्रम और दौरे पड़ना शामिल है।

एम्स में 10 से अधिक बच्चे भर्ती

इसके कारण वायरल, बैक्टीरिया, फंगल संक्रमण या कीट का काटना हो सकते हैं। यह एक गंभीर स्थिति है जिसके लिए तत्काल चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है और गंभीर मामलों में यह जीवन के लिए खतरा हो सकता है। पिछले दिनों एम्स में करीब 10 से अधिक बच्चों को भर्ती किया गया था। इनमें से 3 बच्चों की मौत हुई थी लेकिन नमूने पुणे की प्रयोगशाला में नहीं भेजे जाने के कारण बीमारी की पुष्टि नहीं हो सकी। वहीं अन्य अस्पतालों में भी बच्चों की मौत होने की जानकारी मिली। अब तक 15 से ज्यादा बच्चों की मौत होने की जानकारी है।

मेडिकल में 6 बच्चों की मृत्यु

शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल में अब तक 14 बच्चों को भर्ती किया गया है। इनकी उम्र डेढ़ वर्ष से 5 वर्ष बताई गई। इनमें से 6 बच्चों की मौत हुई है, जबकि 4 बच्चे वेंटिलेटर पर रखे गये हैं। इनकी भी हालत गंभीर बताई गई है। 2 बच्चों की तबीयत सामान्य बनी हुई है। वहीं 2 बच्चों को स्वस्थ होने के बाद छुट्टी दे दी गई।

मेडिकल सूत्रों ने बताया कि इन बच्चों का पहले स्थानीय अस्पतालों में इलाज किया गया था लेकिन तबीयत में सुधार नहीं होने के बाद नागपुर रेफर किया गया। यानी सभी बच्चे पहले से ही गंभीर थे। दरअसल इन बच्चों को जो दवाई दी गई थी उसके कांबिनेशन में अनियमिततता हो सकती है। इसे मेडिकल टर्म में ‘डाइएथिलीन ग्लाइकॉल’ (डीईजी) कहा जाता है।

छिंदवाड़ा से आने वाले मरीज ज्यादा प्रभावित : डॉ. सेलोकर

मनपा के वैद्यकीय अधिकारी डॉ. दीपक सेलोकर ने बताया कि छिंदवाड़ा से आने वाले मरीजों में उक्त शिकायत ज्यादा देखने को मिल रही है। पिछले दिनों कुछ नमूने पुणे की प्रयोगशाला में भेजे गये थे लेकिन सभी नमूने निगेटिव निकले। इस हालत में यह नहीं कहा जा सकता कि मौत मस्तिष्क ज्वर से हुई है। एक डेथ दर्ज की गई है लेकिन इसमें भी केवल जुकाम होने का खुलासा हुआ है। प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए हैं; साथ ही सभी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि नमूने पुणे की प्रयोगशाला में जांच हेतु भेजे जाएं।

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