Mahindra Nagpur Plant Land Acquisition Issue: महिंद्रा एंड महिंद्रा ने नागपुर में अपना सबसे बड़ा ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई और 1,500 एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई। प्रोजेक्ट काफी महत्वाकांक्षी है। विदर्भ में विकास की नई धारा बह सकती है लेकिन अफसोस यह है कि कई महीने बीत जाने के बाद भी प्रशासन प्रोजेक्ट के लिए जमीन नहीं खोज पाया। प्रशासन को एक स्थान पर 1,500 एकड़ जमीन नहीं मिल पा रही है। जहां पर जमीनें हैं वहां पर ‘हाईटेंशन’ लाइन टेंशन दे रही है। किसान जितनी दरें मांग रहे हैं वैसा भाव देना एमआईडीसी के बस की बात नहीं है। दोनों ही कारणों के कारण महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर असर पड़ता दिखाई देने लगा है।
जानकारों ने बताया कि महाराष्ट्र राज्य औद्योगिक विकास निगम (MIDC) ने कंपनी के समक्ष 500 एकड़ जमीन की पेशकश अतिरिक्त बूटीबोरी में की है। यह जमीन कंपनी को पसंद आएगी या नहीं यह भविष्य के गर्त में है क्योंकि कंपनी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसे इस प्रोजेक्ट के लिए कम से कम 1,500 एकड़ जमीन की जरूरत होगी।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि अतिरिक्त बूटीबोरी के पास ही महिंद्रा के लिए जमीन की खोज की गई थी लेकिन उन जमीनों के ऊपर ‘हाईटेंशन’ लाइन का जाल बिछा है। इन्हें हटाना मुश्किल है। इन लाइनों को शिफ्ट करने का विचार भी किया गया लेकिन हाईटेंशन लाइन की शिफ्टिंग में जो खर्च आंका गया है वह काफी ज्यादा है। जितनी लागत में जमीन मिल जाएगी उतनी ही लागत लाइन शिफ्ट करने में आएगी। ऐसे में जमीन हासिल करना एमआईडीसी को मुश्किल होने लगा है। यही कारण है कि एमआईडीसी कई विकल्पों पर विचार करने लगा है और कंपनी को इन विकल्पों में से किसी एक पर विचार करना होगा।
जानकारों की मानें तो अतिरिक्त बूटीबोरी के आसपास के किसान 4,500-5,000 रुपये वर्गमीटर की दरें मांग रहे हैं। यह दरें एमआईडीसी की दरों की तुलना में काफी ज्यादा हैं। वर्तमान में अतिरिक्त बूटीबोरी में 2,000-2,250 रुपये वर्गमीटर की दरें एमआईडीसी की हैं। अगर एमआईडीसी 4,500 रुपये वर्गमीटर की दर से जमीन लेती है तो उसके लिए महंगा सौदा हो जाएगा। इन सभी समस्याओं से अब तक पार नहीं पाया जा सका है और समय बीतता जा रहा है।
कंपनी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि असेंबली लाइन बनाने के लिए उन्हें बिल्कुल सीधी जमीन चाहिए। तभी ट्रैक्टरों का निर्माण विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड इकाई में हो सकेगा। यही कारण है कि कंपनी को लगभग 1,500 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। अब यह देखना होगा कि 500 एकड़ में सबसे लंबी असेंबली लाइन बना पाना संभव होगा या नहीं।
महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी ऑटोमोटिव विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) सुविधा स्थापित करने पर लगभग 15,000 करोड़ का निवेश करने की घोषणा की थी। पूर्ण रूप से चालू होने के बाद यह प्लांट हर साल 5 लाख वाहन और 1 लाख ट्रैक्टर बनाने में सक्षम होगा। यह प्लांट कंपनी के अगली पीढ़ी के प्लेटफॉर्म जैसे यूएन-आईक्यू का समर्थन करेगा और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरतों को पूरा करेगा।
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महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) ने अतिरिक्त बूटीबोरी एस्टेट में पहले 2 भूखंडों (कुल 500 एकड़) की पेशकश की है। इस भूखंड की लागत लगभग 440 करोड़ तय की गई है। कंपनी को 15 दिनों के भीतर 110 करोड़ का प्रारंभिक भुगतान करके इस प्रस्ताव को स्वीकार करना होगा।