आज से शीत सत्र (सौजन्य-नवभारत) 
नागपुर

शीत सत्र: सरकार लाएगी 18 विधेयक, विपक्ष के बहिष्कार पर फडणवीस का पलटवार, नागपुर में चढ़ा सियासी पारा

Winter Session Maharashtra: महाराष्ट्र शीत सत्र आज से शुरू; सरकार 18 विधेयक पेश करेगी। विपक्ष के चाय बहिष्कार पर फडणवीस का हमला, विकास और किसानों के मुद्दे पर फोकस।

प्रिया जैस

Maharashtra Assembly Session: मंत्रिमंडल की बैठक से पहले राज्य सरकार ने उसकी चाय पार्टी का बहिष्कार करने को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। सरकार ने विपक्षी दलों की हालिया पत्र-परिषद को अत्यंत निराशाजनक और केवल परेशानी व्यक्त करने वाली बताया है।

मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने जोर देकर कहा कि विपक्ष के पास न तो कोई दिशा है और न ही मुद्दों को उठाने की इच्छाशक्ति दिखाई देती है। सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों को दी गई सहायता के बारे में भी जानकारी दी। शीत सत्र के दौरान सदन में 18 विधेयक रखे जाएंगे।

अधिवेशन और विकास पर फोकस

फडणवीस ने कहा कि सरकार नागपुर में होने वाले शीत सत्र के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे किसान, सिंचाई, स्वास्थ्य और बेरोजगारी जैसे सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं। चूंकि अधिवेशन छोटा है, राज्य सरकार ने शनिवार और रविवार को भी काम करने का निर्णय लिया है ताकि अधिकतम कामकाज किया जा सके। यह बताया गया कि नागपुर अधिवेशन में हर दिन सामान्य से दोगुना काम होता है जो सुबह जल्दी शुरू होकर देर रात तक चलता है। सरकार ने इस अधिवेशन में लगभग 18 विधेयक लाने की योजना बनाई है जिन पर चर्चा कर उन्हें पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। सत्तारूढ़ पक्ष ने कहा कि उनका प्रयास विदर्भ के साथ-साथ मराठवाड़ा जैसे पिछड़े क्षेत्रों के मुद्दों को भी हल करना होगा।

लोकाभिमुख कल्याणकारी योजनाएं

विकास परियोजनाओं के संबंध में एकनाथ शिंदे ने कहा कि उनका पैर एक्सीलरेटर पर है, जबकि विपक्षी दल स्पीडब्रेकर डालने वाले हैं। उन्होंने कहा कि महायुति ने पिछले डेढ़ साल में कई लोकाभिमुख कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं और महाराष्ट्र जीडीपी, स्टार्टअप और विदेशी निवेश में देश में नंबर एक पर है।

विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास का आरोप

फडणवीस ने विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए कहा कि उनके पास अब लोकतंत्र पर बोलने का कोई अधिकार नहीं बचा है। इसका कारण बताते हुए कहा गया कि विपक्ष को देश के संविधान द्वारा तैयार किए गए किसी भी संस्थान न्यायालय, चुनाव आयोग, आरबीआई, या विधानमंडल पर विश्वास नहीं है।

विपक्ष के नेता (एलओपी) के पद के संबंध में सरकार ने स्पष्ट किया कि इस बारे में कोई भी निर्णय लेना माननीय अध्यक्ष और सभापति के पूर्ण अधिकार क्षेत्र में आता है। सरकार ने विपक्ष को सुझाव दिया कि उन्हें केवल सदन की सीढ़ियों पर स्टंट करने की बजाय सकारात्मक तरीके से जनता के प्रश्नों को सदन में उठाना चाहिए।

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