नागपुर ट्रैफिक जाम, महालगीनगर चौक,(सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

विकास या मुसीबत? नागपुर की सड़कों पर ट्रैफिक का तांडव; फ्लाईओवर निर्माण बना सिरदर्द

Nagpur Traffic News: नागपुर के महालगीनगर चौक और मानेवाड़ा मार्ग पर फ्लाईओवर निर्माण से ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था बढ़ गई है। नागरिक रोज धूल, जाम और परेशानी का सामना कर रहे हैं।

अंकिता पटेल

Nagpur Traffic Flyover Construction: नागपुर की सड़कों पर इन दिनों विकास नहीं बल्कि अव्यवस्था दौड़ती नजर आ रही है। दिघोरी के आगे महालगीनगर चौक पर पिछले एक वर्ष से कछुआ गति को भी चुनौती दे रहा है। ठेकेदार मस्त है और जनता त्रस्त है। चल रहा उड़ान पुल निर्माण लोगों के लिए रोज की मुसीबत बन गया है। यहां का ट्रैफिक पार करते ही वाहन चालक राहत की सांस भी नहीं ले पाते कि उदयनगर से मानेवाड़ा चौक तक दूसरे पुल निर्माण का जाम उनका इंतजार करता मिलता है।

प्रशासन द्वारा ट्रैफिक व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और वैकल्पिक मार्गों की कोई ठोस योजना जमीन पर दिखाई नहीं देती। नतीजा यह है कि हजारों नागरिक रोज घंटों धूल, धुएं और जाम में फंसकर मानसिक व आर्थिक परेशानी झेलने को मजबूर हैं। ट्रकों के फंसते ही लग जाती हैं लंबी कतारें म्हालगीनगर चौक में उड़ान पुल का निर्माण कार्य पिछले एक वर्ष से जारी है।

सड़क के दोनों और बमुश्किल 10 फीट की जगह छोड़ी गई है। अब इस 10 फीट के गलियारे से 2 बड़े वाहन एक साथ निकलने की कोशिश करते है ती नतीजा होता है सड़क जामा निर्माण स्थल पर गहरी खुदाई तो कर दी गई है। लेकिन सुरक्षा के नाम पर एक अदद मजबूत दीवार तक खड़ी करने की जहमत प्रशासन ने नहीं उठाई मानी प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में मुहूर्त देख रहा हो।

  • सबसे प्रभावित क्षेत्र म्हालगीनगर चौक, मानेवाड़ा
  • मुख्य समस्या ट्रैफिक जाम, गहुँ, संकरी सडक
  • प्रभावित मार्ग हुडकेश्वर, विधीरी, अयोध्यानगर, मानेवाड़ा
  • रोजाना प्रभावित लोग स्कूल-कॉलेज छात्र कर्मचारी, मजदूर, व्यापारी
  • जाम का प्रमुख कारण चीमा निर्माण कार्य और भारी वाहन
  • वैकल्पिक रास्तों पर दबाव बस्तियों के भीतर बढ़ी आवाजाही
  • सबसे लंबा जाम उदयनगर से मानेवाड़ा चौक तक

दिघोरी पुलिया से शुरू होती है जाम की समस्या

दिघोरी पुलिया से उतरते ही आफत की शुरुआत हो जाती है। यहीं से महालगीनगर पुल निर्माण क्षेत्र शुरू हो जाता है। ताजबाग और बिजली पादर हाउस की तरफ से आने वाला ट्रैफिक जब एक जगह मिलता है, तो सड़कों पर वाहनों का समंदर उमड़ पड़ता है। रही सही कसर बिजली पावर हाउस चौक के टर्निंग पॉइंट घर बना एक 'ऐतिहासिक' गड्डा पूरी कर देता है जहां दलान से उतरते वाहन अनियंत्रित होकार आए दिन फिसल रहे हैं। कई वाहन चालक यहां गिरकर घायल हो चुके है। सड़क की हालत भी बेहद ऊबड़-खाबड़ हो चुकी है।

1 घंटे पहले निकलना पड़ता है घर से

पूर्व नागपुर क्षेत्र में पारडी, भांडेवाड़ी, हुड़केश्वर, दिघोरी और आसपास के क्षेत्रों से बूटीबोरी तथा हिंगना की ओर जाने वाले कर्मचारी, मजदूर, छात्र और अधिकारी अब पहले से एक घंटा पहले घर से निकल रहे हैं, पहले जो सुबह 9 बजे निकलते थे अब उन्हें 8 बजे ही रवाना होना पड़ता है क्योंकि रास्ते में कितनी देर जाम मिलेगा इसका अनुमान नहीं रहता। 2 किलोमीटर का सफर बन गया चुनौती: महालगीनगर और मानेवाडा चौक के बीच की दूरी लगभग 2 किलीमीटर है लेकिन ट्रैफिक जाम के कारण यह छोटा सफर भी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य जल्द पूरा नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

ट्रैफिक पुलिस नहीं, लोग खुद संभाल रहे व्यवस्था

इतने व्यस्त चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस की नियमित तैनाती नहीं रहती, परिणामस्वरूप वाहन चालक अपनी सुविधा अनुसार वाहन निकालने की कोशिश करते हैं और अध्यवस्था बढ़ जाती है। सुबह और शाम के समय स्थिति सबसे अधिक खराब रहती है। मुख्य मार्ग पर जाग से बचने के लिए कई वाहन चालक कॉलोनियों और बस्तियों के भीतर से रास्ता निकालते है। इससे रिहायशी इलाकों में भी वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अब छोटी गलियों में भी दिनभर ट्रैफिक बना रहता है और बच्चों तथा बुजुर्गों की सुरक्षा को खतरा बढ़ गया है।

कॉलोनियां बनी हाईवे इस मार्ग पर मंगल कार्यालय अस्पताल, होटल, देसी शराब की दुकानें, दवाखाने और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान मौजूद है, यहां आने-जाने वाले वाहनों की वजह से ट्रैफिक दबाव और बढ़ जाता है। मुख्य मार्ग के इस नर्क से बचने के लिए वाहन चालकों ने अब बस्तियों के भीतर की शांत गलियों को अपना शॉर्टकट बना लिया है। नतीजा यह है कि अब रिहायशी इलाकों में रहने वाले बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना दूभर हो गया है।

दुकान के आगे सिर्फ धूल और धुआं

जब से यह पुल का काम शुरू हुआ है, हमारा धंथा 60% गिर गया है। दुकान के ठीक सामने दिनभर जाम लगा रहता है। संकरी सड़क के कारण ग्राहक गाड़ी खड़ी करने की सोच भी नहीं सकता, दिनभर गाड़ियां रेंगती है, जिससे उड़ने वाली धूल सीधे हमारी दुकान के सामान घर बैठती है। सास लेना भारी हो गया है। टैक्स हम समय पर भरते हैं, लेकिन प्रशासन ने हमें इस धूल और धुएं के भरोसे छोड़ दिया है। -व्यापारी, राकेश गुप्ता

सिर्फ जाम की वजह से छूटी है क्लास

मेरा कॉलेज सुबह 9 बजे का है। लेकिन मुझे सुबह 7:45 पर ही घर से निकलना पड़ता है। कब ट्रैफिक हो जाए, कहां नहीं जा सकता है। इस मानसिक तनाव के कारण पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। क्या डिजिटल इंडिया के छात्रों को अपनी पढ़ाई का कीमती समय सड़कों पर जाम में बर्बाद करना चाहिए? -इजीनियरिंग छात्रा, अंजलि देशमुख

दिहाड़ी कटने का डर

अगर बुटीचोरी साइट पर सुबह 8:30 बजे साहब, हम रोज कमाने-खाने वाले लोग है। तक नहीं पहुंचे, ती ठेकेदार अधे दिन की दिहाड़ी काट लेता है। इस म्हालगीनगर और मानेवाड़ा के जाम के डर से मुझे सुबह 7:30 बजे उठकर बिना खाए-पिए भागना पड़ता है। शाम को घर लौटते समय भी यहीं नर्क मिलता है। थककर चूर हो जाते हैं। बड़े लोगों को क्या, वो तो एसी गाड़ी में बैठते हैं, मरना तो हम जैसे गरीबों को ही पड़ता है। -मजदूर, रमेश उइके

-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से अनुज साहू की रिपोर्ट

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