कलमेश्वर MIDC की चार औद्योगिक इकाइयों ने संपत्ति कर की मांग को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की पीठ ने याचिकाओं को प्रतिवेदन मानकर निपटाने का निर्देश दिया।
स्थानीय निकायों को 12 सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लेना होगा।
Nagpur High Court Decision: नागपुर कलमेश्वर औद्योगिक क्षेत्र (एमआईडीसी) में स्थित औद्योगिक इकाइयों द्वारा संपत्ति कर की मांग को चुनौती देते हुए अलग-अलग इकाइयों की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई जिस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने याचिकाओं को प्रतिवेदन (रिप्रेजेंटेशन) मानकर 12 सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार फैसला करने का आदेश स्थानीय निकायों को दिया।
कोर्ट ने कहा कि जब तक इस प्रतिवेदन पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता तब तक प्राधिकारी याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कर वसूली की कोई भी कठोर या दंडात्मक कार्रवाई न करें। एम एस एसाप इंडिया लिमिटेड, एम एस सुपरफाइन मिनरल्स, एम/एस माइक्रोमेष मिनरल्स एंड मेटल्स तथा एम एस वंडर कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड की ओर से याचिकाएं दायर की गई।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि हाई कोर्ट की समकालीन पीठ द्वारा 5 अगस्त 2026 को 'द बदलापुर इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन व अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य में दिए गए।
फैसले और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय स्मॉल स्केल एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन व अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य अन्य के स्यास्ति विधिक सिद्धांतों के अनुसार स्थानीय निकायों को एमआईडीसी क्षेत्र में सपत कर लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
अदालत ने इन तकों पर संज्ञान लेते हुए स्थानीय निकायको निर्देशित किया कि विदाको अभ्यावेदन मानकर प्रभावितों को सुनवाई का अवसर दिया जाए और उपर्युक्त नायिक निर्मायके आलोक में 12 सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।
हाई कोर्ट के इस महत्वपूर्ण निर्देश से नागपुर कलमेश्वर एमआईडीसी (MIDC) क्षेत्र की उन औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत मिली है, जिन पर संपत्ति कर का भारी दबाव था। अदालत के स्पष्ट आदेश के अनुसार, जब तक स्थानीय निकाय इन याचिकाओं या अभ्यावेदनों पर नियमानुसार अंतिम निर्णय नहीं ले लेते, तब तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक या कठोर कर वसूली की कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। इससे कानूनी लड़ाई लड़ रहे उद्योगों को फिलहाल सुरक्षा और न्याय की उम्मीद बंध गई है।