ईंधन संकट,(सोर्स: सौजन्य AI) 
नागपुर

युद्ध का असर जेब पर, नागपुर में महंगाई का नया झटका, ईंधन और जरूरी सामान के बढ़े दाम; आम आदमी पर बढ़ा बोझ

Nagpur Fuel Price Fike: नागपुर में पेट्रोल-डीजल, दूध, सीएनजी और सोने की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ईंधन महंगा होने से रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

अंकिता पटेल

Nagpur Market Price Hike: नागपुर शहर में महंगाई ने एक बार फिर आम जनता की जेब पर सीधा असर डाला है। युद्ध की आग का असर अब दिखने लगा है। घरेलू व कमर्शियल सिलेंडर से शुरू हुआ सफर अब दूध तक पहुंच चुका है। इस बीच औद्योगिक डीजल, सोना, सीएनजी भी महंगे हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है। 15 मई की सुबह नींद खुलते ही 'महंगाई डायन' ने लोगों को फिर पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों के रूप में डरा दिया।

सिटी में पेट्रोल 107.13 रुपये प्रति लीटर और डीजल के भाव 93.67 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। इसमें भी कंपनियों के हिसाब से रेट बढ़े हैं। किसी में पेट्रोल का रेट 107.26 तो डीजल 93.79 रुपये प्रति लीटर चल रहा है।

ईधन महंगा होने से एक बार फिर से महंगाई का तांडव नजर आयेगा। इसका सीधा असर बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने मिलेगा। माल ढुलाई महंगी होगी जिससे खाद्य सामग्री, सब्जियां, फल और अन्य जरूरी सामानों के दाम और अधिक बढ़ने की आशंका है। कीमतों में हुई बढ़ोतरी से आम आदमी की चिंता बढ़ गई है। वहीं ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि ईंधन कीमतों में लगातार वृद्धि से संचालन लागत बढ़ रही है। यदि जल्द राहत नहीं मिली तो पूरा कारोबार उठप पड़ जायेगा।

मुश्किल हो जाएगा घर चलाना

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एक-एक कर चीजें महंगी हो रही है जो इस बात का संकेत है कि भविष्य में चीजे पहुंच से दूर हो जाएंगी और एक सामान्य परिवार के लिए घर बलाना मुश्किल हो जाएगा। अनाज-किराना पहले ही महंगा हो चुका है। मार्केट में रोजमर्रा के सामान के दाम यह तो बढ़ गए है या फिर उसका आकार छोटा कर दिया गया है। पहले एक लेने से जो उत्पाद पूरे महीने चल जाता था, अब 2-2 खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।

  • आश्वर्य इस बात का है कि इतनी महंगाई बढ़ने के बाद भी कोई आवाज तक बुलंद नहीं कर रहा है।
  • वर-मकान, वाहन से लेकर कुछ भी बीज ऐसी नहीं बची है जो इन दिनों महंगाई की चपेट मैनहो।
  • अब सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ाकर आग में घी डालने का काम किया है।
  • अब आने महगाई से निजात मिलना मुश्किल हो गया है।

ट्रांसपोर्टरों की उड़ी नींद

ट्रांसपोर्टर कुक्कू मारवाह बताते हैं कि पहले ही हाईवे के कुछ-कुछ पम्पों पर 5,000 रुपये से ज्यादा का डीजल नहीं दिया जा रहा है। इससे गाड़ियों को दिल्ली, कोलकाता, मुंबई सहित कई अन्य जगहों पर पहुंचने में काफी विलब हो रहा है और अब ऊपर से सरकार ने फिर से डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर कमर तोड़ दी है। पहले ही डीजल नहीं मिलने से ट्रांसपोर्टर परेशान है और ऊपर से कीमतें बढ़ा दीं।

यहां डीजल तो बढ़ता चला जा रहा है लेकिन कंपनियां माल भाड़ा बढ़ाती नहीं है। आज जिस तरह से डीजल महंगा होता जा रहा है, उस तरह भाड़ा भी बढ़ाया जाना चाहिए, कोलकाता, मुंबई, मद्रास जाने के लिए एक गाड़ी में 700 से 750 लीटर डीजल लगता है लेकिन कंपनियां अपना काम चलाने के लिए बड़ी की जगह 8 से 10 टन पासिंग वाली गाड़ियों का उपयोग करेंगी, ऐसे में 16, 24 और 32 टन पासिंग गाड़ियों ठप पड़ जायेंगी, ऐसे में ट्रांसपोर्ट कारोबार ठंडा पड़ सकता है। सरकार की कीमतों में इजाफा करते समय महंगाई से लेकर हर चीज का ध्यान रखना चाहिए।

दूध के दाम बढ़े, बिगड़ा बजट

गृहिणी लक्ष्मी मलहारे कहती हैं कि महंगाई का सबसे बड़ा असर अब रसोई पर पड़ा है। दूध के दाम बढ़ा दिए गए हैं। 2 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इससे छोटे बच्चों को दूध पिलाना मुश्किल हो गया है। चाय पिलाना भी महंगा सौदा हो गया। इस फैसले का सीधा असर हर घर के मासिक खर्च बढ़ जाएगा क्योंकि दूध भारत के दैनिक उपयोग की सबसे जरूरी वस्तुओं में से एक है।

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