नागपुर हाई कोर्ट, भरण-पोषण मामला,(सोर्स-सोशल मीडिया) 
नागपुर

झूठ बोलकर नहीं मांग सकते गुजारा भत्ता! HC ने कहा-अदालत से सच छिपाने वालों को राहत नहीं

Maintenance Order: पत्नी द्वारा आय और बैंक खातों की जानकारी छिपाने पर नागपुर हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का भरण-पोषण आदेश रद्द कर मामला दोबारा सुनवाई के लिए निचली अदालत को भेज दिया।

अंकिता पटेल

Nagpur Maintenance Order Set Aside: नागपुर फैमिली कोर्ट द्वारा भरण-पोषण को लेकर दिए गए आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए नीलेश मेश्राम ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 'जो व्यक्ति न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाता है, उसे साफ हाथों के साथ आना चाहिए।

हाई कोर्ट ने पत्नी द्वारा अपनी आय और बैंक खातों की जानकारी छिपाने के कारण फैमिली कोर्ट के पिछले आदेश को रद्द कर दिया और मामले को फिर से सुनवाई के लिए निचली अदालत में भेज दिया है।

याचिकाकर्ता पति का आरोप था कि उसकी पत्नी प्राइवेट ट्यूशन क्लासेस चलाकर अच्छी खासी रकम कमा रही है और उसके कई बैंक खाते हैं। आरोप था कि अपनी संपत्ति और देनदारियों का खुलासा करते समय पत्नी ने जानबूझकर अपने बैंक खातों और पिता के साथ जॉइंट अकाउंट की जानकारी अदालत से छिपाई।

बैंक डिटेल देने का अल्टीमेटम

दोनों पक्षों की दलीलों के बाद हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट द्वारा विविध आपराधिक आवेदन में दिए गए फैसले और आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया, साथ ही मामले को वापस ट्रायल कोर्ट (फैमिली कोर्ट) में भेज दिया गया, पत्नी को सख्त निर्देश दिया गया है कि वह आदेश की तारीख से 4 सप्ताह के भीतर अपने सभी बैंक खातों के स्टेटमेंट रिकॉर्ड पर रखे।

इसके बाद दोनों पक्ष चाहें तो नए सिरे से अपने-अपने सबूत पेश कर सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक ट्रायल कोर्ट नए सिरे से अपना अंतिम फैसला नहीं सुना देती तब तक पति द्वारा पत्नी को 7,000 रुपये और 11 वर्षीय बेटी को 5,000 रुपये का जो अंतरिम भरण-पोषण तय किया गया था। वह जारी रहेगा।

फैमिली कोर्ट के आदेशों की हुई अवहेलना

  • सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि फैमिली कोर्ट ने 27 फरवरी 2024 और 11 जून 2024 को आदेश पारित कर पत्नी को 8 जून
  • 2020 से लेकर अब तक के अपने सभी बैंक खातों के स्टेटमेंट पेश करने का निर्देश दिया था।
  • इसके बावजूद पत्नी ने ये दस्तावेज अदालत में पेश नहीं किए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पत्नी के स्वैये पर कड़ी आपत्ति जताई।
  • अदालत ने कहा कि अदालत से तथ्यों को छिपाने पर 'प्रतिकूल निष्कर्ष' निकाला जाना चाहिए।
  • देनदारियों का खुलासा करते समय पत्नी ने जानबूझकर अपने बैंक खातों और पिता के साथ जॉइंट अकाउंट की जानकारी अदालत से छिपाई।

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