नागपुर, हाई कोर्ट, कृषि उद्योग,(सोर्सः सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर HC ने राज्य सरकार को लगाई कड़ी फटकार; 1999 की फूड प्रोसेसिंग सब्सिडी योजना रद्द करने पर जताई नाराजगी

Nagpur High Court: नागपुर हाई कोर्ट ने कृषि उद्योगों को सब्सिडी देने के वादे से पीछे हटने पर राज्य सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि सरकार को अपने नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।

अंकिता पटेल

Nagpur High Court Agriculture Industry: नागपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कृषि उद्योगों को दी जाने वाली प्रोत्साहन (सब्सिडी) राशि के वादे से पीछे हटने पर कड़ी फटकार लगाई। न्या। अनिल पानसरे और न्या। रजनीश व्यास ने सरकार के रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की है कि राज्य सरकार को अपने नागरिकों के साथ इस तरह का वर्ताव नहीं करना चाहिए।

राज्य सरकार ने 18 मई 1999 को एक सरकारी प्रस्ताव जारी किया था जिसके तहत कृषि उद्योगों (फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स) की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए कुल पूंजी निवेश के 15% के बराबर अतिरिक्त सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया था।

याचिकाकर्ता नाकोडा ग्रुप ने इसी योजना से प्रभावित होकर अपने उद्योग की स्थापना की थी जिसका प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन दिसंबर 1999 में और स्थायी रजिस्ट्रेशन 7 फरवरी 2003 को हुआ था। हालांकि 18 जनवरी 2006 को सरकार ने एक नए प्रस्ताव के जरिए 1999 की इस योजना को रद्द कर दिया और याचिकाकर्ता का दावा खारिज कर दिया।

सरकार की बेतुकी दलील

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दायर अतिरिक्त हलफनामे में दी गई जानकारी के अनुसार 1999 का सरकारी प्रस्ताव केवल एक 'नीतिगत घोषणा' थी जिसे लागू करने के लिए कोई विशिष्ट प्रावधान या दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए थे।

इस पर कोर्ट ने सरकार की दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 18 मई 1999 की योजना याचिकाकर्ता जैसे निवेशकों से किया गया एक स्पष्ट वादा था।

अदालत ने स्पष्ट किया कि एक बार जब राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता जैसे लोगों को उद्योग में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर दिया तो उसके बाद सरकार के लिए इस तरह के आधारों पर लाभ देने से इनकार करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

कोर्ट ने आगे कहा कि यदि यह नीति बजटीय मंजूरी या किन्हीं अन्य शतों के अधीन थी तो सरकार को इसे रद्द करने का फैसला तुरंत लेना चाहिए था, न कि 7 साल बाद।

सरकारी अधिकारियों पर भी उठे गंभीर सवाल

  • अदालत ने सरकार द्वारा दायर किए गए हलफनामे की प्रक्रिया पर भी हैरानी जताई।
  • यह हलफनामा कृषि विभाग के एक 'डेस्क ऑफिसर' के निर्देश पर नागपुर के जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी रवींद्र जे। मनोहरे द्वारा दायर किया गया था।
  • हाई कोर्ट ने सहायक सरकारी वकील को निर्देश दिया कि वे इस बात पर स्पष्टीकरण दें कि क्या कोई डेस्क ऑफिसर, राज्य के उद्योग विभाग और वित्त विभाग के सचिवों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी ऐसे अधिकारी को अधिकृत कर सकता है जिसका इस मामले से कोई लेना-देना ही नहीं है।
  • कोर्ट ने डेस्क ऑफिसर द्वारा दिए गए इस अधिकार-पत्र को भी रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया है।

FIR दर्ज होते ही राहुल गांधी ने खत्म किया धरना, बोले- न्याय की दिशा में पहला कदम

झारखंड में भर्ती घोटाले पर देवेंद्र महतो का बड़ा ऐलान, 24 अगस्त से ‘भर्ती सुधार यात्रा’, सरकार को दी चेतावनी

PM तारिक रहमान के भारत दौरे पर बढ़ा सस्पेंस, राष्ट्रपति भवन ने ‘चेंज ऑफ गार्ड’ रद्द करने का फैसला लिया वापस

आज की ताजा खबर 21 अगस्त LIVE: पुलिस ने मानी धरने पर बैठे राहुल गांधी की मांग, पेलेट गन केस में दर्ज हो रही FIR

पुलिस ने मानी धरने पर बैठे राहुल गांधी की मांग, पेलेट गन केस में दर्ज हो रही FIR