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पूर्व विधायक अनिल सोले भाजपा में वापस लौट आए हैं।
सोले ने भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के समर्थन में प्रचार करने का आश्वासन दिया।
तकनीकी कारणों से सोले अपना नामांकन वापस नहीं ले सकते, लेकिन अपने लिए प्रचार नहीं करेंगे।
पूर्व विधायक गिरीश व्यास ने भी पार्टी से इस्तीफा वापस ले लिया।
सोले ने टिकट चयन प्रक्रिया और पुराने कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने का मुद्दा उठाया।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने संगठन की कार्यप्रणाली में सुधार के सुझावों पर अमल करने का भरोसा दिया।
अब इस चुनाव में भाजपा के सुधाकर कोहले और कांग्रेस के अभिजीत वंजारी के बीच मुकाबले पर नजर रहेगी; राकांपा (शरदचंद्र पवार) के नितेश कराले भी मैदान में हैं।
Anil Sole BJP Return: नागपुर विधान परिषद के नागपुर स्नातक चुनाव क्षेत्र चुनाव में भाजपा के बागी उम्मीदवार पूर्व विधायक अनिल सोले अंतत: मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस से चर्चा के बाद पार्टी में लौट आए हैं।
उन्होंने इस चुनाव में अपना नाम वापस लेने और पार्टी उम्मीदवार सुधाकर कोहले के समर्थन में कार्य करने का आश्वासन सीएम व पालकमंत्री के समक्ष दिया। उनके साथ ही पूर्व विधायक गिरीश व्यास ने भी अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। दोनों पूर्व विधायकों के पार्टी में वापस लौटने से भाजपा खेमे ने राहत की सांस ली है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने सोले व व्यास के पार्टी व संगठन हित में लिए गए निर्णय के लिए उनका अभिनंदन किया है। सीएम ने कहा कि सोले ने चुनाव में नामांकन भरने के कारणों को खुलेदिल से सामने रखा। कुछ सुझाव भी दिये हैं जिन्हें अमल में लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने बताया कि राजस्व मन्त्री चंद्रशेखर बावनकुले, उपेन्द्र कोठेकर, सतीश धौड भी सोले के साथ चर्चा के दौरान उपस्थित थे। सोले चाहते हैं कि पार्टी कितनी भी बड़ी हो जाए लेकिन कार्यप्रणाली नहीं बदलनी चाहिए, वे हमारी कार्यप्रणाली से नाराज थे, कई बार गलतियां हो जाती हैं लेकिन उसे सुधारा जाएगा।
अनिल सोले ने पार्टी के पुराने निष्ठावान कार्यकर्ताओं को किनारे करने की शिकायत भी की और कहा कि उन्हें पार्टी व संगठन में जिम्मेदारी दी जाए। उनकी भावनाओं पर जरूर काम किया जाएगा।
मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस फडणवीस ने कहा कि सोले ने कभी पार्टी विरोधी गतिविधिया नहीं कीं, उलट वे पार्टी व संगठन से नाराज कार्यकर्ताओं को मनाकर जोड़ने का कार्य करते थे। वे कभी पार्टी का नुकसान नहीं होने देंगे, वे पार्टी उम्मीदवार के लिए प्रचार करेंगे। सुधाकर कोहले उनके विद्यार्थी रहे है। गुरू के रूप में अपने शिष्य की आशीर्वाद देंगे।
अनिल सोले तकनीकी रूप से अपना नामांकन वापस नहीं ले सकते लेकिन अब वे खुद अपने लिए प्रचार नहीं करते हुए कौहले के समर्थन में कार्य करेंगे। यह घोषणा करते हुए वे भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि स्नातक सीट के लिए कार्यकर्ताओं की भावनाओं को देखते हुए वे बीते ।
वर्ष से मेहनत कर रहे थे। जब उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दी तो समर्थक कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई और उनकी भावनाओं के चलते ही उन्होंने नामांकन दाखिल किया, अब मुख्यमंत्री फडणवीस, पालकमंत्री बावनकुले ने हमारी भावनाएं समझी हैं और संगठनात्मक व कार्यप्रणाली में सुधार का आश्वासन दिया है।
अनिल सोले के समर्थन की घोषणा के साथ ही पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले पूर्व विधायक गिरीश व्यास से भी सीएम, पालकमंत्री की चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि अपनी भावनाएं उनके समक्ष रखी। सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है।
अनिल सोले के बागी होने से कांग्रेस महकमा खुश था कि उसके उम्मीदवार अभिजीत वंजारी को इसका लाभ मिलेगा। सोले के वापस लौटने से अब इस चुनाव में कांग्रेस व भाजपा के बीच सीधी टक्कर होगी। मविआ में शामिल घटक दल राकां एसपी के नितेश कराले मैदान में है। ऐसे में कांग्रेस को नुकसान हो सकता है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सुबह से शाम तक संभाग के सभी 6 जिलों के विधायकों से अलग-अलग बैठकें लेते रहे।
कोराडी में नागपुर जिले के विधायकों की बैठक ली जिसमें पार्टी उम्मीदवार के लिए गंभीरता से कार्य करने का निर्देश उन्होंने दिया।
उसके बाद रामगिरी में दिनभर जिलानिहाय अलग-अलग बैठकें लेकर स्नातक चुनाव के संदर्भ में मार्गदर्शन किया।