

अनिल सोले के समर्थन में गिरीश व्यास ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता छोड़ी।
व्यास ने अपना कार्यालय सोले के चुनाव प्रचार के लिए खोला।
चंद्रशेखर बावनकुले और रवींद्र चव्हाण के मनाने के प्रयास सफल नहीं हुए।
भाजपा में असंतोष का फायदा कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी को मिलने की चर्चा।
वर्ष 2020 के चुनाव में वंजारी ने भाजपा के संदीप जोशी को 18,910 मतों से हराया था।
Nagpur BJP Rebel Crisis: नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज पूर्व विधायक अनिल सोले के समर्थन में पूर्व विधायक गिरीश व्यास ने भी भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। व्यास ने अपना कार्यालय सोले के चुनाव प्रचार के लिए खोल दिया है। इससे भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार सुधाकर कोहले के सामने राजनीतिक चुनौती बढ़ने की चर्चा है।
व्यास का सोले के समर्थन में उतरना भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार सुधाकर कोहले के लिए चुनौती माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद नागपुर स्नातक चुनाव के समीकरणों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
नागपुर। नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भाजपा के पूर्व विधायक अनिल सोले को टिकट नहीं मिलने के बाद पार्टी के भीतर शुरू हुआ असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। सोले के समर्थन में पूर्व विधायक गिरीश व्यास ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। व्यास ने अपना कार्यालय भी सोले के चुनाव प्रचार के लिए उपलब्ध करा दिया है।
गिरीश व्यास को नागपुर भाजपा के पुराने संगठनात्मक नेताओं में गिना जाता है। ऐसे में उनका सोले के समर्थन में उतरना पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को और चर्चा में ले आया है। भाजपा ने इस चुनाव में सुधाकर कोहले को अधिकृत उम्मीदवार बनाया है।
अनिल सोले को नामांकन वापस लेने के लिए मनाने के कई प्रयास किए गए। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने उनसे अपील की, जबकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण भी उनके घर पहुंचे। हालांकि, खबर के अनुसार ये प्रयास सफल नहीं हो सके।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी बागी उम्मीदवारों से नाम वापस लेने की अपील करते हुए कहा था कि पार्टी ने सक्षम उम्मीदवारों को मौका दिया है। इसके बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी सोले को नामांकन वापस लेने के लिए समझाने का अनुरोध किए जाने की चर्चा रही।
8 अक्टूबर को गिरीश व्यास द्वारा अपना कार्यालय सोले के प्रचार के लिए खोलने के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला कि सोले चुनावी मैदान में बने रहने के लिए तैयार हैं।
भाजपा के भीतर मतों के बंटवारे की स्थिति बनने पर कांग्रेस उम्मीदवार और निवर्तमान विधान परिषद सदस्य अभिजीत वंजारी के चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगा।
वर्ष 2020 के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के संदीप जोशी को 18,910 मतों से हराया था। इससे पहले 2014 में भाजपा के अनिल सोले ने कांग्रेस के डॉ. बबनराव तायवाडे को 31,259 मतों से पराजित किया था। उस चुनाव में सोले को 52,485 मत मिले थे।
अब सोले के दोबारा मैदान में होने और भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार सुधाकर कोहले के चुनाव लड़ने के बीच मुकाबले के त्रिकोणीय होने की संभावना जताई जा रही है।
गिरीश व्यास के पिता पंडित बच्छराज व्यास नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनसंघ से जुड़े प्रमुख नेताओं में शामिल थे। वे संघ के संगठनात्मक कार्य से आगे बढ़कर जनसंघ के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचे थे। वर्ष 1965 में विजयवाड़ा अधिवेशन में उन्हें भारतीय जनसंघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था।
गिरीश व्यास ने भी संघ और भाजपा के संगठनात्मक कार्यों में लंबे समय तक भूमिका निभाई। वर्ष 2015 में भाजपा ने उन्हें नागपुर स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद का उम्मीदवार बनाया था, जहां वे निर्विरोध निर्वाचित हुए थे।
ऐसे में सोले के समर्थन में उनका इस्तीफा नागपुर भाजपा की आंतरिक राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।