विकसित महाराष्ट्र 2047 के महत्वाकांक्षी लक्ष्य प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
नागपुर

महाराष्ट्र का अपना इन-हाउस बैंक, 35 लाख करोड़ के इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को मिलेगी रफ्तार, जानिए पूरी योजना

Maharashtra Government NBFC: महाराष्ट्र सरकार राज्य के विकास को गति देने के लिए अपना 'इन-हाउस बैंक' (NBFC) बना रही है। इससे ₹35 लाख करोड़ के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को सस्ता कर्ज मिलेगा।

प्रमोद यादव

Maharashtra In-house Bank: देश की आर्थिक राजधानी के रूप में देखे जाने वाले महाराष्ट्र में अब एक ऐसा वित्तीय ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है जो राज्य के विकास की परिभाषा ही बदल देगा।

5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था और 'विकसित महाराष्ट्र 2047 के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में राज्य सरकार का वित्त विभाग अपनी खुद की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) अर्थात एक तरह का 'सरकारी इन-हाउस बैंक' बनाने जा रहा है। वित्त विभाग ने इस प्रोजेक्ट पर काम भी आरंभ कर दिया है।

इस परियोजना का खाका तैयार करने के लिए जल्द ही केंद्र अथवा राज्य के पब्लिक सेक्टर बैंक तथा सरकारी क्षेत्र में 20,000 करोड़ की पूंजी अथवा ऋण जुटाने में अनुभवी सहायक कंपनी को एक सलाहकार एजेंसी के रूप में नियुक्त किया जाएगा जो इस विशाल संस्थान के ढांचागत निर्माण, लीगल प्रक्रियाओं के साथ इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का पूरा ब्लूप्रिंट तयार करेगी।

विकसित महाराष्ट्र-2047 के लक्ष्य

अक्टूबर महीने के पहले सप्ताह में चयन को लेकर प्रक्रिया हो जाएगी। महाराष्ट्र राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट को 5 मुख्य चरणों में पूरा करने की समयसीमा भी तय की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने अपने 5 ट्रिलियन इकोनॉमी और 'विकसित महाराष्ट्र-2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले एक दशक में मेट्रो, एक्सप्रेस-वे, स्मार्ट सिटीज, जल परियोजनाओं, सीवरेज, किफायती आवास और स्वास्थ्य शिक्षा जैसे सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए लगभग 25 लाख करोड़ से 35 लाख करोड़ के विशाल निवेश की आवश्यकता को आंका है।

अब तक एमएमआरडीए, एमएसआरडीसी, सिडको, महा रेल और एमआईडीसी जैसे सरकारी निकाय अलग अलग कमर्शियल बैंकों से महंगे ब्याज दरों पर लोन लेते थे या सरकारी बजट पर निर्भर रहते थे। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार अपनी एक नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) बना रही है जो सभी सरकारी विभागों के पास पड़े अतिरिक्त पैसे को एक जगह इकट्ठा करेगी।

इस इकट्ठा पूंजी और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुटाए गए सस्ते फंड की मदद से सरकार के अपने प्रोजेक्ट्स को कम ब्याज पर लोन दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स के पैसे की बचत करते हुए बिना किसी वित्तीय रुकावट के राज्य के सभी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करना है।

केवल सरकारी विभागों, प्राधिकरणों को कर्ज

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के स्केल बेस्ड रेगुलेशन के तहत पंजीकृत होने पर यह संस्था मुख्य रूप से केवल यह संस्था पूरी तरह से केवल राज्य सरकार के विभागों, निकायों और विकास प्राधिकरणों को ही कर्ज उपलब्ध कराएगी।

इस एनबीएफसी से किसी निजी पक्ष को कर्ज नहीं दिया जाएगा। सरकारी निकायों द्वारा जारी किए जाने वाले बॉन्ड्स के लिए क्रेडिट गारंटी और लिक्विडिटी सपोर्ट भी प्रदान किया जाएगा। महाराष्ट्र इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, क्लाइमेट फाइनेंस फंड और अफोर्डेबल हाउसिंग फंड जैसे समर्पित कोषों का प्रबंधन होगा।

ब्याज का हजारों करोड़ का बोझ कम होगा

वर्तमान में राज्य का बजट और विभिन्न निगमों द्वारा अलग-अलग लिया जाने वाला कर्ज बिखरा हुआ है। नई एनबीएफसी संस्था राज्य सरकार के लिए एक केंद्रीकृत ट्रेजरी मैनेजर के रूप में कार्य करेगी, जिससे विकास कार्यों के लिए नकदी की कभी कमी नहीं होगी।

एमएसआरडीसी, एमएमआरडीए, सिडको, एमआईडीसी और वाटर बोर्ड्स जैसी प्रमुख राज्य एजेंसियों ने पूर्व में वाणिज्यिक बैंकों से उच्च ब्याज दरों पर कर्ज ले रखे हैं।

यह नई एनबीएफसी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से कम लागत पर फंड जुटाएगी और इन सरकारी निकायों के पुराने महंगे कर्जी को कम ब्याज पर रीफाइनेंस करेगी। इससे ब्याज का हजारों करोड़ रुपये का बोझ बचेगा जिसका सीधा उपयोग नई परियोजनाओं में किया जा सकेगा।

 रियाज अहमद, नवभारत

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