नागपुर में टाउनशिप के नाम पर फर्जीवाड़े का खतरा फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
नागपुर

नागपुर की गेटेड टाउनशिप में मुंगेरीलाल के हसीन सपने, प्रीमियम लोकेशन के नाम पर ठगी का खेल?

Nagpur Township Fraud: नागपुर में गेटेड टाउनशिप का चलन बढ़ने के बीच प्रीमियम लोकेशन के नाम पर ग्राहकों को लुभाने और कथित फर्जीवाड़े की आशंका जताई गई है।

अंकिता पटेल

Nagpur Gated Township Real Estate: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय हैवीवेट मंत्री नितिन गडकरी द्वारा आरेंज सिटी को इंटरनेशनल सिटी बनाने के सपने पर कुछ कारोबारी ग्रहण लगाने का काम कर रहे हैं। सिटी में गेटेड टाउनशिप का चलन बढ़ा है।

इस मौके का लाभउठाकर कुछ लोग मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखाकर प्रीमियम लोकेशन के झांसा देकर दिनदहाड़े धोखाधड़ी और दगाबाजी कर रहे हैं। मौके का लाभ उठाकर मुंबई-पुणे और हैदराबाद जैसे शहरों से कुछ फर्जी ब्रांड सत्यम और सहारा सिटी जैसे घोटाले को अंजाम देने की जुगाड़ में लगे हुए हैं।

समुद्री बीच के भंवर में फंसे....

ताजा मामला हिंगना स्थित 'नागपुर मरीना' टाउनशिप प्रोजेक्ट का है। चमचमाते विज्ञापनों, बड़े-बड़े वादों और लुभावने दावों के साथ लॉन्च किए गए मेसर्स होएबल इम्पैक्टम लैंड प्राइवेट लिमिटेड (द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढा) के इस प्रोजेक्ट की आड़ में यह वादा किया गया कि समुद्री किनारे का असली आनंद मिलेगा, पहले से ही यह महारेरा की उन शतों का घनघोर उल्लंघन था क्योंकि आम निवेशकों को इस तरह का कोई भी झांसा नहीं दिया जा सकता।

लोढ़ा समूह की विश्वसनीयता से जुड़ा ब्रांड समझकर पहले लोगों ने इस पर भरोसा किया, मात्र जैसे ही असलियत का पता चला तो पूरा मामला ही उलट गया। अब कई निवेशकों ने प्लॉट वापस करना शुरू कर दिया है। प्लॉट बुकिंग रद्द करने की शर्तें इतनी जटिल रखी गई हैं कि निवेशक को समझ में नहीं आ रहा है वह किस तरह के समुद्री भंवर में फंस गया।

प्लॉट सौदा रद्द होने पर रिफंड अटका

प्लॉट खरीदते समय तो पैसा नागपुर में ही लिया जाने लगा लेकिन अब जब सौदा रद्द करने की बात आई तो पैसा वापस करने के लिए मुंबई के बड़े साहब लोगों के नाम पर टाइम पास किया जा रहा है। खून-पसीने की कमाई को वापस लेने के लिए लोगों को मजबूरी में महारेरा से गुहार लगानी पड़ी।

ऐसे ही एक निवेशक एके पटेल (नाम बदला हुआ) से जुड़े मामले में महारेरा ने नागपुर मरीना के डेवलपर द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढा को फटकार लगाते हुए 30 दिनों के भीतर रिफंड देने का अंतिम आदेश जारी किया है और अवहेलना करने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

ढाई महीने में बुकिंग रद्द की तो लगाया चार्ज

ऐसे ही एक ग्राहक अनूप शिवनारायण व्यास ने नागपुर मरीना में 72,27,281 रुपए की कीमत वाला प्लॉट नंबर सौ-22 को बुक कराया था लेकिन महज ढाई महीने के भीतर ही उन्होंने अपनी बुकिंग रद्द कर दी। जब डेवलपर द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढा ने कटौती के नाम पर अड़ंगा लगाया तो मामला महारेरा पहुंचा। सुनवाई के दौरान 2 प्रतिशत कैंसिलेशन चार्ज काटकर पूरा पैसा लौटाने पर सहमति बनी लेकिन महरेरा के आदेश के बावजूद डेवलपर ने 10 अगस्त की तय समय सीमा तक भुगतान का कोई प्रमाण जमा नहीं किया।

इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए महारेरा के सदस्य महेश पाठक की पीठ ने 21 अगस्त को अंतिम आदेश पारित कर 30 दिनों के भीतर रिफंड प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। आदेश में साथ ही महरेरा ने यह भी साफ किया है कि यदि डेवलपर पैसा वापस लौटाने में विफल रहा तो रेरा एक्ट की धारा 63 के तहत कठोर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

निवेशक के रिफंड पर बिल्डर को झटका

खरीद दारों का भरोसा टूटा, पैसा डूबने का भय

नागपुर मरीना प्रोजेक्ट से खरीदारों के हाथ पीछे खीचने का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। शिकायतकर्ता केस नंबर सीसी 12602432 के खरीदार राजेश पतिराम पहाड़े ने भी द हाउस अभिनंदन लोढा के खिलाफ महारेरा का रुख किया था। जिसके बाद डेवलपर को उन्हें 5,20,531 रुपए की राशि वापस चुकानी पड़ी। खास बात यह कि पहाड़े ने जिस दिन यह 5।20,531 रुपए की राशि देकर प्लॉट बुकिंग की थी, उसके दूसरे दिन ही उन्होंने बुकिंग कैंसिल कर दी।

बाद में उन्हें अपनी बुकिंग राशि वापस पाने के लिए महरेरा पड़ा। इसी कड़ी में एक और खरीदार केस नंबर सीसी 12604235 शहनाज तबस्सुम ने भी पिछले महीने ही महारेरा में शिकायत दर्ज कराई है, जिसकी सुनवाई प्रक्रिया जारी है। एक के बाद एक आवंटियों द्वारा कानूनी रास्ता अपनाने और बुकिंग कैंसिल कराने से नागपुर मरीना प्रोजेक्ट की साख और डेवलपर की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए है। आगे कई चौकाने वाले खुलासे होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

पहले जवाब देने में आनाकानी फिर लीपोपाती वाला जवाब

नागपुर मरीना प्रोजेक्ट में ग्राहकों द्वारा बुकिंग रद्द किए जाने पर प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया। पहले तो कोई जवाब देने को तैयार नहीं हुआ। बाद में नियम-कानून का हवाला देकर लीपापोती करने का प्रयास किया गया, सेल्स एग्जीक्यूटिव आगम जैने ने कहा कि कुछ लोगों को दिक्कत है।

कंपनी की नीति और महारेरा के दिशानिर्देशों के तहत रिफंड प्रक्रिया में समय लगता है। टोकन अमाउंट के रिफंड में 45 से 60 दिन और 10 फीसदी राशि का भुगतान होने पर प्रक्रिया पूरी होने में 90 से 110 दिन लगते हैं।

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