Nagpur Dj Ban Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र राज्य में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए उत्सवों के दौरान बजने वाले डीजे की बजाय पारंपरिक वाद्या यंत्रों के उपयोग की अपील मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की थी। उसके बाद दो दिनों तक डीजे को लेकर भाजपाइयों ने ही जमकर नौटंकी की।
कोई अपील को दरकिनार कर डीजे पर पाबंदी के विरोध में उतर आया तो कोई पूरी तरह पाबंदी की मांग को लेकर आवाज उठाने लगा। नौटंकी तो खत्म हो गई लेकिन डीजे तो आउट ऑफ कंट्रोल ही बज रहा है। ऐसा लग रहा है मानो मुख्यमंत्री के चहेते डीजे पर 'थिरक' रहे हैं।
नेताओं की आपसी जुगलबंदी ने त्यौहार को दो-फाड़ करने का काम किया है। आम जनता क्या चाहती है, इस पर किसी का ध्यान नहीं है। बस दो गुटों में बंटकर वे 'कथक' कर रहे हैं। राज्य की राजधानी मुंबई में दही हांडी के दौरान जम कर डीजे बजाए गए।
राजधानी में बजे डीजे की गूंज यहां तक सुनाई देने लगी। सीएम की सिटी में भी अनेक स्थानों पर कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव डीजे के कानफाडू आवाज के साथ मनाया गया। पुलिस आयुक्त ने पहले तो डीजे पर पाबंदी का आदेश जारी किया, फिर विरोध होता देख बेस साउंड बंद करने की 'शर्त' जोड़ दी।
नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि जुलूसों के दौरान वाहनों पर डीजे का जो उपयोग किया जाता है उस पर पाबंदी रहेगी। कुल मिलाकर उलझन जारी है।
हिन्दूवादी संगठन विहिप ने आरोप लगाया है कि पाबंदी केवल हिन्दुओं के गणेशोत्सव, दुर्गोत्सव, दीवाली आदि पर लगाई जाती है। अन्य समुदायों पर पाबंदी की हिम्मत पुलिस प्रशासन क्यों नहीं करता, भाजपा विधायक प्रवीण दटके ने भी ऐसा ही आरोप लगाते हुए। डीजे पर पाबंदी का विरोध किया था।
हालांकि अब अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन ने मुस्लिम समाज के धार्मिक आयोजनों पर डीजे के उपयोग की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया है। उधर, शिवसेना के कुछ नेताओं ने भी आरोप लगाये कि ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण, पानी की किल्लत आदि केवल हिन्दुओं के त्योहारों पर ही क्यों गिनाए जाते हैं।
भाजपा के ही पूर्व विधायक संदीप जोशी सहित अनेक सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने डीजे के कानफोडू आवाज से नागरिकों, बच्चों, महिलाओं, मवेशियों आदि को होने वाली परेशानियों का हवाला देते हुए डीजे पर स्थानी रोक की मांग रखी है। कुछ लोगों ने तो यह भी सवाल किया है कि धार्मिक उत्सवों में श्रद्धा व आस्था का डीजे से क्या संबंध है।
जितना आनंद पारंपरिक ढोल-ताशा व अन्य उपकरणों से आता है उतना डीजे से नहीं। सवाल यह है कि क्या सिर्फ हुल्लड व मस्ती के लिए ही कुछ लोगों को डीजे चाहिए। नियम यह है कि निर्धारित मानक के अनुरूप ही कम बेस साउंड में रात 10 बजे तक ही डीजे का उपयोग हो लेकिन इसकी आड़ में मनमानी तो चल ही रही है।
नागपुर जिला के पूर्व विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक कृष्णा खोपड़े ने कहा कि डीजे बंदी को चर्चा के माध्यम से सर्वसम्मत और उचित रास्ता निकाला जा सकता है। हिन्दुओं के सारे त्योहार व उत्सव शुरू होने वाले है। महीनों पहले से ही कार्यक्रमों की तैयारियां की जाती है। ऐसी स्थिति में अचानक डीजे बंदी के आदेश जारी किए जाने से धार्मिक कार्यक्रमों पर ही प्रतिबंध लगाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा है, ऐसी आशंका नागरिकों के मन में पैदा हो रही है।