नागपुर हाई कोर्ट, अवैध निर्माण, प्रन्यास,(सोर्स सोशल मीडिया)  
नागपुर

अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट सख्त, याचिका खारिज; नागपुर में बुलडोजर कार्रवाई का रास्ता साफ

Nagpur High Court: नागपुर हाई कोर्ट ने अवैध निर्माण के खिलाफ एनआईटी के तोड़ नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने तथ्य छिपाने को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना गया।

अंकिता पटेल

Nagpur High Court Dismisses Illegal Construction: नागपुर प्रन्यास द्वारा 8 मार्च 2023 को जारी किए गए अवैध निर्माण को तोड़ने के नोटिस को चुनौती देते हुए अरुण जकारिया की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने अवैध निर्माण और अदालत को गुमराह करने के लिए अरुण जकारिया और अन्य द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं द्वारा महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करार दिया। इस फैसले के बाद प्रन्यास द्वारा जारी किए गए तोड़ कार्रवाई के नोटिस का रास्ता साफ हो गया है और अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलने की पूरी संभावना है।

एनआईटी ने यह नोटिस इसलिए जारी किया था क्योंकि याचिकाकर्ताओं का निर्माण बिना किसी स्वीकृत लेआउट प्लान के किया गया था और इसे पूरी तरह अवैध घोषित किया गया था।

शपथ पत्र पर बोला गया झूठ और मिला अंतरिम स्टे

3 अप्रैल 2023 को इस याचिका की पहली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष शपथ पत्र में दावा किया था कि महाराष्ट्र गुंठेवारी विकास अधिनियम, 2001 के तहत उनके प्लॉट को नियमित करने की प्रक्रिया अभी लंबित है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया था कि प्लॉट विकास क्षेत्र में है, उन्होंने नियमितीकरण के लिए आवश्यक शुल्क जमा कर दिया है और वे एनआईटी द्वारा आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। इस बयान पर विश्वास करते हुए और इसे आधार मानते हुए हाई कोर्ट ने शुरुआत में याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दे दी थी और 8 मार्च 2023 के नोटिस पर आगे की कार्रवाई करने पर रोक लगा दी थी।

एनआईटी के जवाब से सामने आया सच

मामले में असली खुलासा तब हुआ जब 29 नवंबर 2023 को एनआईटी ने अपना जवाब दाखिल किया। एनआईटी ने अदालत को दस्तावेजों के साथ बताया कि मौजा हरपुर स्थित जय-हिंद कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के लेआउट में स्थित प्लॉट नंबर 139, 140 और 142 के निर्माण को नियमित करने के लिए याचिकाकर्ताओं द्वारा दिया गया आवेदन दरअसल 26 मार्च 2009 को ही खारिज किया जा चुका था।

हाई कोर्ट का मानना था कि एनआईटी द्वारा सच्चाई सामने लाने के बाद भी याचिकाकर्ताओं ने न तो 2009 के उस अस्वीकृति आदेश को किसी उचित फोरम में चुनौती दी और न ही अपनी वर्तमान याचिका में संशोधन करने की कोई अनुमति मांगी।

नियमितीकरण का आदेश अस्तित्व में नहीं

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि गुंठेवारी अधिनियम के तहत प्लॉट और निर्माण को नियमित करने का कोई आदेश अस्तित्व में नहीं है, इसलिए प्रन्यास द्वारा 8 मार्च 2023 को जारी किए गए नोटिस में कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता है।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि उन्होंने 26 मार्च 2009 को अपना आवेदन खारिज होने के इतने बड़े तथ्य को कोर्ट से छिपाया। इसके अलावा, अपनी याचिका में जानबूझकर झूठा बयान दिया कि उनके प्लॉट का नियमितीकरण अभी लंबित है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा कि यह अदालत को गुमराह करने के समान है और यह न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के अलावा और कुछ नहीं है।

सहारनपुर मस्जिद विवाद: जमीन किसकी है, मस्जिद कितनी पुरानी और बुलडोजर क्यों चला? समझें पूरी कहानी

सुभाष चंद्रा की बढ़ीं मुश्किलें, 1322 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में CBI ने दर्ज की FIR

भाग सकते हो, छिप नहीं सकते..., कश्मीर में सुरक्षाबलों ने लश्कर के पाकिस्तानी कमांडर यासिर को किया ढेर

सहारनपुर मस्जिद पर UP में गरमाई सियासत, मायावती ने की बुलडोजर कार्रवाई रोकने की मांग

Teacher’s Day पर PM मोदी की शिक्षकों संग खास बातचीत, पब्लिक स्पीकिंग से लेकर बच्चों के टैलेंट तक पर हुई चर्चा