Congress Attacks On Bageshwar Baba: नागपुर में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिए गए विवादित बयान (Bageshwar Baba Controversy) ने महाराष्ट्र की राजनीति में दावानल पैदा कर दिया है। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए बागेश्वर बाबा को 'ढोंगी' और 'भोंदू' करार दिया है और उनके खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की है।
कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने एक ट्वीट के जरिए अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि संघ और बीजेपी द्वारा पोषित ऐसे बाबा महाराष्ट्र धर्म को नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि "यह ढोंगी बाबा कहता है कि शिवाजी महाराज युद्ध लड़कर थक गए थे और उन्होंने अपना मुकुट रामदास स्वामी के चरणों में रख दिया। यह न केवल झूठ है, बल्कि हमारे गौरव का अपमान है। ऐसे भोंदू बाबाओं को जनता को चप्पलों से मारकर महाराष्ट्र से खदेड़ देना चाहिए।" सपकाल ने मंच पर मौजूद मोहन भागवत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि जब यह 'विकृत' बाबा महाराज का अपमान कर रहा था, तब इन बड़े नेताओं ने उसे रोका क्यों नहीं? क्या इनके मन में महाराज के प्रति इतना द्वेष भरा है?
विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने भी धीरेंद्र शास्त्री को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जिस महाराज के सामने मुगलों, अंग्रेजों और डचों ने घुटने टेक दिए, उन्हें 'थका हुआ' बताना उनके पराक्रम का अपमान है। वडेट्टीवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या यह महाराष्ट्र धर्म को खत्म करने का बीजेपी-संघ का कोई मनुवादी षड्यंत्र है? मंचासीन नेताओं की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। इस भोंदू बाबा को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
वडेट्टीवार ने शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड़ पर भी तंज कसा, जो अक्सर विरोधियों को ऊपर) पहुंचाने की धमकियां देते रहते हैं। उन्होंने कहा, खुद को छत्रपति का वंशज बताने वाले संजय गायकवाड़ अब कहां छिपे हैं? क्या उनमें हिम्मत है कि वे धीरेंद्र शास्त्री को भी वैसी ही चुनौती दें? अगर वे इस भोंदू बाबा को दबोचते हैं, तो पूरा महाराष्ट्र उनका सत्कार करेगा।
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कांग्रेस की इस आक्रामकता ने महाराष्ट्र सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। छत्रपति शिवाजी महाराज महाराष्ट्र की अस्मिता का केंद्र हैं, और उनके इतिहास के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को यहाँ की जनता बर्दाश्त नहीं करती। अब दबाव मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर है कि वे अपने सहयोगी और श्रद्धेय बाबा के खिलाफ कोई कानूनी कदम उठाते हैं या विपक्ष के इस हमले का राजनीतिक जवाब देते हैं।