बॉम्बे हाई कोर्ट का नागपुर खंडपीठ (सोर्स: सोशल मीडिया)
नागपुर

हाईकोर्ट की NMC को फटकार: गबन की गई रकम 3% ब्याज के साथ लौटाने का कड़ा हुक्म, जनता के पैसे का बहाना खारिज

NMC Refund Order By Bombay High Court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने नागपुर मनपा को झटका देते हुए याचिकाकर्ता की अवैध रूप से वसूली गई 47.68 लाख की राशि 3% वार्षिक ब्याज के साथ 6 महीने में लौटाने का आदेश दिया।

वेदांत जोशी

Bombay High Court Directed Nagpur Municipal Corporation To Refund: नागपुर महानगरपालिका (NMC) द्वारा एक नागरिक से गैर-कानूनी ढंग से वसूली गई लाखों रुपये की अतिरिक्त राशि को दबाकर रखने के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति प्रवीण पाटिल की खंडपीठ ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए मनपा को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता धनराज खंडेलवार से अवैध रूप से वसूले गए 47,68,090 रुपये 3% वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। अदालत ने मनपा को ब्याज सहित पूरी रकम का भुगतान 6 महीने के भीतर करने का सख्त अल्टीमेटम दिया है।

2017 से देना होगा ब्याज, मनपा का 'जनता का पैसा' वाला तर्क खारिज

अदालत के आदेशानुसार, यह ब्याज 2 अगस्त 2017 (जब याचिकाकर्ता ने पहली बार रिफंड के लिए आवेदन किया था) से लेकर राशि के वास्तविक भुगतान की तिथि तक देय होगा। सुनवाई के दौरान मनपा के वकील ने ब्याज का पुरजोर विरोध करते हुए दलील दी थी कि मनपा एक सार्वजनिक संस्था (Public Authority) है और ब्याज का भुगतान करने से जनता के टैक्स के पैसों पर बोझ पड़ेगा। हालांकि, हाई कोर्ट ने मनपा के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि किसी नागरिक के पैसे को बिना किसी कानूनी अधिकार के इतने वर्षों तक रोके रखना पूरी तरह से अनुचित है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित कानूनी सिद्धांतों पर भरोसा जताया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के 'डॉ. पूर्णिमा आडवाणी बनाम एनसीटी दिल्ली सरकार' और 'यूनियन ऑफ इंडिया बनाम टाटा केमिकल्स लिमिटेड' के फैसलों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जब कोई सरकारी निकाय बिना किसी कानूनी अधिकार के राशि एकत्र करता है या उसे रोके रखता है, तो उस पर ब्याज देना उसका अनिवार्य दायित्व बन जाता है।

नागरिक और राजस्व विभाग के बीच नहीं हो सकता भेदभाव

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बिना अधिकार के प्राप्त और उपयोग किए गए धन पर स्वतः ही ब्याज का अधिकार लागू होता है। सरकार या नगर निगम यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते कि उनके पास ब्याज भुगतान का कोई विशिष्ट वैधानिक प्रावधान नहीं है। इस फैसले के बाद अब मनपा प्रशासन में हड़कंप मच गया है, क्योंकि मनमानी वसूली की कीमत अब नगर निगम को ब्याज सहित चुकानी होगी।

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