प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

नोटबंदी में जब्त नकदी बनी रद्दी, बॉम्बे हाई कोर्ट ने जांच एजेंसी पर उठाए सवाल, जानें क्या है पूरा मामला

Nagpur News: नोटबंदी के दौरान जब्त नकदी समय पर जमा न कराने से रद्दी हो गई। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने जांच एजेंसी की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कड़ी टिप्पणी की।

आकाश मसने

Old Currency Notes Case: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने मेसर्स दीपक ट्रेडर्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए कानून प्रवर्तन एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। मामला नोटबंदी के दौरान जब्त की गई नकदी से जुड़ा है, जिसे समयसीमा बीत जाने के बाद वापस किया गया, जिससे वे नोट अब रद्दी के समान हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि 21 नवंबर 2016 को प्रतिवादी जांच एजेंसी ने याचिकाकर्ता से 11,15,000 रुपये की राशि जब्त की थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, यह राशि उनके देसी शराब के व्यवसाय से हुई आय थी। आयकर विभाग ने 28 दिसंबर, 2016 को हुई अपनी जांच के बाद स्पष्ट किया कि इस राशि में अघोषित आय का कोई मामला नहीं बनता है।

नियमों की अनदेखी का आरोप

इसके बाद 19 जनवरी, 2017 को जांच एजेंसी ने पूरी राशि याचिकाकर्ता को लौटा दी। हालांकि लौटाई गई कुल राशि में 1,62,500 रुपये पुराने 500 रुपये के नोटों (कुल 325 नोट) के रूप में थे। चूंकि भारत सरकार की नीति के अनुसार ये पुराने नोट 31 दिसंबर, 2016 के बाद प्रतिबंधित हो चुके थे, इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक ने इन्हें बदलने से इनकार कर दिया। अदालत में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि 'विनिर्दिष्ट बैंक नोट (जब्त नोटों की जमा) नियम 2017' के तहत यदि कोई नकदी 30 दिसंबर, 2016 को या उससे पहले किसी एजेंसी द्वारा जब्त की गई थी, तो उसे अदालत के निर्देश पर आरबीआई या नामित बैंक में जमा या बदला जा सकता था।

जांच एजेंसी विफल

कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी जांच एजेंसी इन नियमों के तहत कार्रवाई करने में विफल रही। इस विफलता का परिणाम यह हुआ कि याचिकाकर्ता के पास जब्त किए गए उन पुराने नोटों को बदलने का कोई कानूनी रास्ता नहीं बचा। न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकारी वकील को निर्देश लेने के लिए समय दिया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी, 2026 के लिए तय की है।

व्यापारी का पक्ष रख रहे वकील ने दलील दी कि सरकारी नियमों के बावजूद एजेंसी की देरी की वजह से उनके मुवक्किल को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। अब यह देखना होगा कि अदालत इस मामले में पीड़ित व्यापारी को राहत देने के लिए क्या आदेश जारी करती है।

Cyclone Murasu पड़ा कमजोर, आंध्र-तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट; दिल्ली में छाएगी धुंध

करोड़ों की संपत्ति छोड़ देशसेवा में लगाया जीवन, जानिए महात्मा गांधी के 5वें पुत्र जमनालाल बजाज की कहानी

गुवाहाटी फायरिंग मामले में एनकाउंटर के बाद आरोपी ढेर! सब-इंस्पेक्टर की सर्विस पिस्तौल छीनने की हुई थी कोशिश

Shakuntala Devi: बिना कैलकुलेटर पलक झपकते करती थीं बड़ी गणनाएं, जानिए कैसे बनीं मानव कंप्यूटर

भारत-पाक सीमा के पास बड़ी साजिश नाकाम, श्रीगंगानगर में ट्रेन को उड़ाने की थी कोशिश, जांच में जुटी पुलिस