Nagpur Anti-Goonda Squad: नागपुर शहर में अपराध होने के बाद आरोपी की तलाश करने की पारंपरिक पुलिसिंग से आगे बढ़ते हुए अब 'अपराध से पहले रोकथाम' पर जोर दिया जाएगा। पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटिल ने साफ किया है कि शहर में सुरक्षित माहौल बनाना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि मुंबई की तर्ज पर अब नागपुर में भी एंटी गुंडा स्क्वाड बनाया जाएगा जो क्राइम ब्रांच से जुड़कर शहर भर में सक्रिय अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाएगा।
रिकॉर्ड पर मौजूद अपराधियों की कुंडली अपडेट की जाएगी और उनके आर्थिक व पनाह देने वाले मददगारों की भी जानकारी जुटाई जाएगी। लगातार गैंगवार में शामिल अपराधियों की अलग डेटाबेस तैयार किया गया है। जरूरत पड़ने पर ऐसे अपराधियों को जेल में स्थानबद्ध करने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं भूमाफिया पर शिकंजा कसने के लिए भी विशेष दस्ता काम करेगा।
नागपुर पुलिस थाना स्तर पर अपराधों के पैटर्न का विश्लेषण कर यह पता लगाएगी कि किस इलाके में, किस समय और किस तरह के अपराध ज्यादा हो रहे हैं। वाहन चोरी और सेंधमारी में पुराने अपराधियों की भूमिका, उनकी गतिविधियां और नए संदिग्धों की जानकारी को एक साथ जोड़ा जाएगा। इससे पुलिस की गश्त केवल 'रूटीन' न रहकर अपराध की आशंका वाले स्थानों पर केंद्रित होगी।
शहर में उपलब्ध सीसीटीवी नेटवर्क को अपराध नियंत्रण के लिए और प्रभावी बनाया जाएगा। संदिग्ध व्यक्ति की पहचान से लेकर उसकी आवाजाही का पीछा करने तक तकनीक का इस्तेमाल होगा। यातायात व्यवस्था में इस्तेमाल किए गए एआई आधारित सिस्टम का विस्तार पूरे शहर में किया जाएगा और इसे सीसीटीएनएस से जोड़ने की योजना है। यानी सड़क पर कैमरे और सिस्टम सिर्फ ट्रैफिक नहीं देखेंगे बल्कि अपराधियों पर भी नजर रखेंगे।
इसके साथ ही पुलिस के 112 पर औसत रिस्पांस टाइम 5 से 7 मिनट तक लाया गया है। इसे और कम करने का लक्ष्य रखा गया है, सिर्फ समय ही नहीं, कॉल के बाद पुलिस मौके पर पहुंची या नहीं, शिकायत दर्ज हुई या नहीं और पीड़ित को आवश्यक सहायता मिली या नहीं, इसका भी मूल्यांकन किया जाएगा।
महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले उत्पीड़न को रोकने के लिए नागपुर पुलिस ने विशेष पहल की है। हैदराबाद पुलिस की तर्ज पर नागपुर में अब 'निर्भया पथक' का गठन किया गया है। इस विशेष दस्ते में 144 महिला पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को शामिल कर कुल 12 स्क्वाड तैयार किए गए हैं। निर्भया पथक की महिला पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
'निर्भया पथक' की पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर तैनात रहेंगी, ताकि छेड़खानी और महिलाओं को परेशान करने वाले लोगों पर नजर रखी जा सके और उन्हें पुलिस की मौजूदगी का पहले से पता न चले, उन्हें जल्द ही कैमरे भी उपलब्ध करवाए जाएंगे जिससे उत्पीड़न करने वालों को रंगे हाथ पकड़कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का उद्देश्य ऐसे मामलों पर तत्काल कार्रवाई के साथ ही महिलाओं और युवतियों में सुरक्षा का भरोसा पैदा करना है। चेन स्नैचिग और सड़क पर होने वाले अपराधों के लिए गश्त और नाकाबंदी बढ़ाई जाएगी। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी निगरानी से संदिग्धों की पहचान की जाएगी। खास बात यह है कि पुलिस अब केवल वारदात के बाद फुटेज खंगालने तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि संदिग्ध गतिविधियों की पहले से जानकारी जुटाकर अपराध रोकने पर जोर देगी।