Nagpur IAF Land Transfer: नागपुर में डॉ. बाबासाहब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के विस्तार और विकास में आ रही सबसे बड़ी अड़चन अब पूरी तरह दूर हो गई है। राज्य सरकार और भारतीय वायु सेना के बीच जमीन के हस्तांतरण को लेकर बनी सहमति के बाद नागपुर एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण और नए टर्मिनल निर्माण कार्य को भारी गति मिलने की उम्मीद है।
भारतीय वायु सेना को आवंटित जमीन के एक हिस्से पर अतिक्रमण बना हुआ था लेकिन इस सहमति के चलते अब जमीन को अगले 7 से 10 दिनों के भीतर पूरी तरह खाली कराने की प्रतिबद्धता जताई गई है। जमीन खाली होते ही पूरा भूखंड भारतीय वायु सेना के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले को लेकर बुधवार को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ हुई बैठक की जानकरी देते हुए बताया कि नागपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के निर्माण के लिए भारतीय वायु सेना की 27 एकड़ भूमि की जरूरत थी।
वायु सेना ने आवश्यक जमीन तत्काल राज्य सरकार को हस्तांतरित करने पर सहमती जताई है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया है। बैठक में 9 हेक्टेयर जमीन एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन के निर्माण के लिए जल्द उपलब्ध कराने और इसके लिए जरूरी निर्माण अनुमति देने पर सहमति बनी है। इसके अलावा शेष 18 हेक्टेयर जमीन जून 2028 तक उपलब्ध करा दी जाएगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार महाराष्ट्र सरकार और जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड नए एयरफोर्स परिसर तक आवश्यक सड़क एवं अन्य कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएंगे, साथ ही नई वायु सेना सुविधाओं का निर्माण पूरा होने तक एयरफोर्स के रोजमर्रा के संचालन में भी आवश्यक सहयोग दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस सहमति से नागपुर एयरपोर्ट के फेज-1 का विकास कार्य जून 2029 से पहले पूरा करने में मदद मिलेगी। बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े।
देवेंद्र फडणवीस के मुताबिक एयरपोर्ट के तकनीकी क्षेत्र में भारी मशीनरी की आवाजाही के लिए सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल गई है। इसके लिए अलग मानक कार्यप्रणाली तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री के ओएसडी लोकेशचंद्र भी मौजूद थे।
जीएमआर नागपुर की तरफ से बताया गया कि जैसे ही वायु सेना को अपनी पूरी जमीन का कब्जा मिलेगा वे वहां अपना बजट आवंटित कर निर्माण कार्य शुरू करेंगे।
इसके बाद जून 2028 से वायु सेना अपनी मौजूदा जमीन को नए एयरपोर्ट टर्मिनल के विस्तार के लिए चरणबद्ध तरीके से सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर देगी। इस फैसले से राज्य सरकार और वायु सेना के बीच का लंबित मुद्दा हल हो गया है।
वायु सेना को अपनी जमीन मिलने के बाद वह नया ढांचा तैयार करेगी जिससे एयरपोर्ट अथॉरिटी को नया और भव्य टर्मिनल बनाने के लिए आवश्यक जमीन बिना किसी रुकावट के उपलब्ध हो जाएगी।