नागपुर, ई-चालान, ट्रैफिक नियम, (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो) 
नागपुर

नागपुर में ट्रैफिक नियमों का डबल स्टैंडर्ड: ना टाइमर चालू, ना स्टॉप लाइन दिख रही, पर ई-चालान जारी

Nagpur Traffic Rules: नागपुर में AI कैमरों से रेड सिग्नल जंप पर ई-चालान जारी हो रहे हैं, लेकिन कई चौराहों पर स्टॉप लाइन, जेब्रा क्रॉसिंग और सिग्नल टाइमर ही गायब या खराब हैं।

अंकिता पटेल

Nagpur E Challan Controversy: नागपुर जिले में ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर शहर में इन दिनों सख्ती जारी है। रेड सिग्नल जम्प करते ही ई-चालान ठोक दिया जाता है। एआई लैस सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जा रही है। ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी धड़ाधड़ चालान बना रहे हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन स्टॉप लाइनों का पालन कराने के लिए चालान काटे जा रहे हैं, वे आखिर सड़क पर हैं कहां? विडंबना यह है कि ट्रैफिक नियमों का डंडा तो आम वाहन चालक पर चल रहा है लेकिन उन्हीं नियमों की बुनियाद यानी स्टॉप लाइन, जेब्रा क्रॉसिंग, लेन मार्किंग और सिग्नल टाइमर आदि को सही बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने में प्रशासन खुद ही फिसड्डी साबित हो रहा है। शहर के कई प्रमुख चौराहों पर सफेद पट्टियां महीनों से धुंधली हैं। कई जगह पूरी तरह मिट चुकी हैं लेकिन कैमरे पहले की तरह चालू हैं और चालान भी लगातार जारी हैं। टाइमर काम नहीं कर रहे।

हवा में करोड़ों खर्च, जमीन पर कुछ नहीं

ट्रैफिक पुलिस वाहन चालकों से नियमों के अक्षरशः पालन की अपेक्षा करती है लेकिन सड़क पर जरूरी संकेतों को दुरुस्त रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। नागपुर में करोड़ों रुपये सड़क विकास, स्मार्ट सिटी और इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम पर खर्च हुए लेकिन स्टॉप लाइन की कुछ मीटर सफेद पट्टी समय पर नहीं बन पाई।

यानी जमीन से ऊपर खंभों पर आधुनिक सिग्नल, कैमरे और लाइटें आदि लगा दी गई लेकिन जमीन पर स्टॉप लाइन, जेब्रा क्रॉसिंग का खर्च बचा लिया गया। सवाल यह है कि क्या नियम सिर्फ जनता के लिए हैं?

वाहन चालक-पैदल चलने वाले, दोनों के लिए खतरा

समाजसेवी नरेन्द्र सतीजा ने कहा कि नियमों का पालन करने में किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन सड़क पर संकेत ही नहीं दिखेंगे तो वाहन कहां रोका जाए? यदि कैमरे गलती पकड सकते हैं तो संबंधित विभागों की लापरवाही क्यों नहीं पकड़ते? सड़क पर संकेतों का अभाव चालक और पैदल चलने वाले, दोनों के लिए खतरा बन चुका है।

करोड़ों की सड़कें लेकिन हजारों की पेंटिंग तक नहीं

ज्ञात हो कि हर वर्ष सड़क मरम्मत, डामरीकरण और सौंदर्याकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं उपेक्षा का शिकार हैं।

बारिश के बाद अधिकांश चौराहों पर रोड मार्किंग गायब हो जाती है और महीनों तक दोबारा नहीं बनाई जाती। यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल जुर्माने से नहीं आती।

स्पष्ट रोड मार्किंग, रिफ्लेक्टिव थर्मोप्लास्टिक पेंट, लेन संकेत और नियमित ऑडिट उतने ही जरूरी हैं। जब सड़क ही चालक को सही जगह नहीं बताएगी तो केवल चालान से अनुशासन नहीं आएगा।

शहर में ऐसे कई 'ब्लाइंड' चौराहे, लापरवही किसकी ?

  • वैरायटी चौक : स्टॉप लाइन लगभग मिट चुकी है लेकिन कैमरे पूरी तरह सक्रिय हैं।
  • रविनगर चौक बारिश के बाद रोड मार्किंग गायब, वाहन चालक अनुमान से गाड़ी रोकते है।
  • शंकरनगर चौक जेब्रा क्रॉसिंग धुंधली, पैदल यात्रियों की सुरक्षा खतरे में।
  • अजनी चौक स्टेशन और मेडिकल मार्ग का व्यस्त जक्शन लेकिन स्टॉप लाइन स्पष्ट नहीं।
  • छत्रपति व जयप्रकाश नगर चौक भारी ट्रैफिक के बावजूद लेन मार्किंग और स्टॉप लाइन फीकी, (झांसी रानी चौक, मारिस कॉलेज चौक, कॉटन मार्केट, अग्रसेन चौक, मेडिकल चौक, वैद्यनाथ चौक, अशोक चौक, तुकड़ोजी पुतला चौक, सक्करदरा चौक, रिंग रोड पर आने वाले लगभग हर चौराहा।)

सिर्फ वाहन चालकों की जिम्मेदारी है नियम पालन

ट्रैफिक नियम दोतरफा जिम्मेदारी हैं। एक ओर वाहन चालक नियमों का पालन करें, तो दूसरी ओर प्रशासन सड़क पर मानक संकेत उपलब्ध कराए। यदि स्टॉप लाइन मिट चुकी है और जेब्रा क्रॉसिंग गायब है, तो केवल चालान काटना व्यवस्था नहीं, बल्कि एकतरफा कार्रवाई माना जाएगा। पहले सड़कों को नियमों के अनुरूप बनाइए, फिर जनता से नियम पालन की अपेक्षा कीजिए।

सवाल, जिनके जवाब जरूरी !

  • 1 स्टॉप लाइन ही नहीं दिखे तो चालक वाहन कहां रोके ?
  • क्या खराब रोड मार्किंग के लिए किसी विभाग या अधिकारी की जवाबदेही तय हुई?
  • 3 करोड़ों की स्मार्ट सिटी में कुछ मीटर रोड मार्किंग क्यों नहीं बच पाती?
  • 4 क्या ई-चालान से पहले सड़क संकेतों का ऑडिट नहीं होना चाहिए?

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