Waris Pathan Social Media Hacked: मुंबई में साइबर अपराध का एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एआईएमआईएम (AIMIM) के दिग्गज नेता और पूर्व विधायक वारिस पठान को निशाना बनाया गया है। अज्ञात साइबर अपराधियों ने वारिस पठान का सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर लिया है और अब उन्हें ब्लैकमेल करते हुए 5 लाख रुपये की रंगदारी की मांग की जा रही है। हैकर्स ने पठान को चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने फिरौती की रकम नहीं चुकाई, तो उनकी और उनके परिवार की निजी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ (मॉर्फिंग) कर उन्हें इंटरनेट पर सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
इस घटना के बाद मुंबई की वर्ली पुलिस और साइबर सेल पूरी तरह सक्रिय हो गई है। वारिस पठान ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें 16 अप्रैल से ही लगातार धमकी भरे कॉल और मैसेज मिलने शुरू हो गए थे। हैकर्स ने अपनी पहचान छिपाने के लिए विदेशी सिम कार्ड्स और इंटरनेट कॉलिंग का सहारा लिया है। पुलिस इस मामले को एक अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट से जोड़कर देख रही है, जो अक्सर सार्वजनिक हस्तियों को निशाना बनाकर उनसे मोटी रकम वसूलने की कोशिश करते हैं।
प्राथमिक जांच और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर पुलिस को संदेह है कि वारिस पठान को किए गए धमकी भरे कॉल कंबोडिया से ओरिजिनेट हुए हैं। हैकर्स ने तीन अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय नंबरों का इस्तेमाल किया है। साइबर विशेषज्ञों की एक टीम वर्तमान में उन आईपी एड्रेस (IP Address) और डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है, जिनका उपयोग अकाउंट हैक करने के लिए किया गया था। कंबोडिया जैसे देशों से संचालित होने वाले ये गिरोह अक्सर 'डिजिटल अरेस्ट' और 'हनी ट्रैप' जैसी वारदातों के लिए कुख्यात हैं।
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पीड़ित वारिस पठान का आरोप है कि हैकर्स न केवल पैसे मांग रहे हैं, बल्कि उनके परिवार की मर्यादा को ठेस पहुँचाने की कोशिश भी कर रहे हैं। हैकर्स ने निजी तस्वीरों को अश्लील या आपत्तिजनक रूप में मॉर्फ करने की धमकी दी है, जो किसी भी व्यक्ति की सामाजिक छवि को धूमिल करने का एक खतरनाक हथियार है। पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्ली पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, जिनमें जबरन वसूली और धमकी (धारा 308 और 351) शामिल हैं, के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
मुंबई पुलिस के साइबर सेल के अधिकारी अब इस बात की तफ्तीश कर रहे हैं कि वारिस पठान का अकाउंट किस प्रकार के 'फिशिंग अटैक' या 'मालवेयर' के जरिए हैक किया गया। इस बीच, पुलिस ने जनता और सार्वजनिक हस्तियों को सलाह दी है कि वे अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर 'टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन' सक्रिय रखें और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे कंबोडियाई अधिकारियों और इंटरपोल के माध्यम से इन डिजिटल अपराधियों तक पहुँचने की संभावनाओं को भी तलाश रहे हैं ताकि इस गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके।