Uddhav Thackeray on PM Modi Meeting With Shinde MPs: शिवसेना के नाम और 'धनुष-बाण' चुनाव चिन्ह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही महत्वपूर्ण सुनवाई के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में घमासान चरम पर पहुंच गया है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एकनाथ शिंदे गुट के सांसदों के बीच हुई मुलाकात पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कड़ा ऐतराज जताया है।
बांद्रा स्थित अपने आवास 'मातोश्री' में मीडिया को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की मुलाकातों के जरिए न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट पर परोक्ष रूप से दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी और शिंदे गुट के सांसदों की बैठक पर तीखा हमला बोलते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, "पहले एकनाथ शिंदे अमित शाह से मिलने भागते थे, अब वे प्रधानमंत्री से मिल रहे हैं। जब अमित शाह मुंबई में होते हैं, तो वे पीएम मोदी से मिलते हैं। आखिरकार प्रधानमंत्री ने 'डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं' का संदेश किसे दिया? क्या यह संदेश अमित शाह को दिया गया, देवेंद्र फडणवीस को या फिर शीर्ष अदालत को? हम इस अखबार की कतरन को अदालत के समक्ष पेश करेंगे और बताएंगे कि कैसा माहौल बनाया जा रहा है।"
उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि यह लड़ाई केवल शिवसेना तक सीमित नहीं रह गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 'विश्वासघात का वायरस' अब पूरे देश में फैल रहा है और पीएम मोदी अन्य पार्टियों के बागियों को संदेश दे रहे हैं कि हमारे पास आओ, तुम्हारा बाल भी बांका नहीं होगा।
देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर चिंता व्यक्त करते हुए उद्धव ठाकरे ने देश और राज्य की जनता से सीधे लोकतंत्र को बचाने की अपील की। उन्होंने कहा, "देश का युवा आज बेरोजगारी और राजनीतिक नाटक देखकर गुस्से में है।
अब सरकार चाहे कितनी भी कोशिशें कर ले, युवा चुप बैठने वाले नहीं हैं। प्रधानमंत्री की यह भूमिका बेहद गंभीर है और हम इसे सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में जरूर लाएंगे। गद्दार आखिर किससे डर रहे हैं और पीएम किसे बचा रहे हैं, यह सच देश के सामने आना ही चाहिए।"
गौरतलब है कि ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत द्वारा पीएम की इस बैठक को 'फाफड़ा-जलेबी की दावत' बताए जाने के बाद उद्धव ठाकरे के इस कड़े रुख ने महायुति सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल द्वारा चुनाव आयोग के फैसले पर उठाए गए कानूनी सवालों के बीच ठाकरे गुट अब इन राजनीतिक मुलाकातों को अदालत के सामने बतौर प्रमाण रखने की तैयारी कर रहा है। आने वाले दिनों में शीर्ष अदालत की प्रतिक्रिया पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी।