Tukaram Munde Impact On Milk Price: त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले मुंबईकरों की जेब पर महंगाई की एक और मार पड़ने वाली है। मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने ताजा भैंस के दूध के थोक भाव में सीधे 9 रुपये प्रति लीटर यानी लगभग 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का निर्णय लिया है। नई दर 1 सितंबर 2026 से लागू होगी। जिसके बाद थोक कीमत 93 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। मुंबई में ताजा तबेला दूध की कीमत 9 रुपये प्रति लीटर की रिकॉर्ड बढ़ोतरी की घोषणा की गई है।
दूध की इस महंगाई के पीछे एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के अभियान का असर भी दिखाई दे रहा है। महाराष्ट्र FDA ने दूध में मिलावट और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रखी है। हाल के महीनों में राज्यभर में डेयरी, ट्रांसपोर्टर, वितरक और खुदरा स्तर तक जांच बढ़ाई गई है।
नवी मुंबई में हाल ही में मिलावट वाले दूध के एक मामले में कार्रवाई हुई, जबकि राज्य में बड़ी मात्रा में मिलावटी दूध नष्ट किया गया है। FDA की सख्ती का उद्देश्य मिलावट रोकना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित दूध उपलब्ध कराना है, लेकिन नियमों के पालन, जांच और सप्लाई चेन में बदलाव का असर छोटे कारोबारियों की लागत पर असर दिखाई पड़ रहा है।
मुंबई और एमएमआर की दूध जरूरतों के लिए महाराष्ट्र के विभिन्न दुग्ध उत्पादक क्षेत्रों पर निर्भरता है। पश्चिम और उत्तर महाराष्ट्र से आने वाली सप्लाई शहर की डेयरी चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
त्योहारों के दौरान दूध की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले बढ़ जाती है, क्योंकि घरों के अलावा होटल, चाय-नाश्ते की दुकानें, मिठाई की दुकानें और धार्मिक आयोजनों में भी दूध की खपत बढ़ती है। ऐसे में मांग और उपलब्ध सप्लाई के बीच अंतर कीमतों पर दबाव डाल सकता है। राज्य के सबसे बड़े त्यौहार गणेशोत्सव पर सप्लाई का दबाव काफी बढ़ जाता है।
दूध उत्पादकों के अनुसार, इस समय पशुओं की कीमत, चारा, दाना और अन्य उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष सी.के. सिंह के मुताबिक, कुछ प्रमुख पशु आहार और कच्चे माल की कीमतों में 25 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। ऐसे में मौजूदा दर पर दूध बेचना उत्पादकों के लिए मुश्किल हो रहा था।
दूध सप्लायर्स, तबेला मालिकों ने मूल्य वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण उत्पादन लागत में वृद्धि बताई है। किसानों और दूध उत्पादकों पर आर्थिक दबाव का असर दिखाई दे रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि पशुओं के चारे में इस्तेमाल होने वाले कुछ प्रमुख अनाज और अन्य सामग्री के दामों में बढ़ोतरी हुई है।
फरवरी 2026 में भी मुंबई में तबेला दूध की कीमत बढ़ी थी। उस समय थोक भाव 91 रुपये से बढ़कर 93 रुपये प्रति लीटर हो गया था। अब करीब 6 महीने बाद इसमें सीधे 9 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है। महाराष्ट्र में दूध की कीमतों में इससे पहले भी बढ़ोतरी हो चुकी है। राज्य में 11 अगस्त से गाय और भैंस के दूध के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी।
नया भाव लागू होने के बाद मुंबई में ताजा तबेला दूध का थोक मूल्य पहली बार 100 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को पार कर जाएगा। इसकी चर्चा तेजी से सोशल मीडिया पर शुरू हो गई है। घर की चाय की तुलना ताज होटल में मिलने वाली चाय से होने लगी है।
दूध भारत के अधिकांश परिवार की मुख्य जरूरतों में शामिल हैं। मुंबई जैसे महानगर में बड़ी संख्या में परिवारों की प्रतिदिन दूध पर निर्भरता है। ऐसे में प्रति लीटर 9 रुपये की बढ़ोतरी छोटी कीमत नहीं है। यदि कोई परिवार प्रतिदिन 2 किलो ग्राम दूध खरीदता है, तो केवल दूध पर उसका अतिरिक्त खर्च लगभग 18 रुपये प्रतिदिन होगा। महीने में यह राशि करीब 540 रुपये तक पहुंच सकती है।
इसके अलावा दूध सिर्फ सीधे तौर पर पीने के लिए भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। चाय, कॉफी, दही, लस्सी, मिठाई और कई अन्य खाद्य पदार्थों में भी इसका उपयोग होता है। इसलिए दूध की कीमत बढ़ने का असर केवल दूध के बिल तक ही सीमित नहीं रह सकता।
दूध और चीनी जैसे कि सामान के सामान से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। दूध आधारित व्यवसायों के लिए भी यह चुनौती बन सकती है। चाय की दुकानें, मिठाई की दुकानें, होटल, रेस्तरां पर इस महंगाई का असर होगा।
दूध की कीमत बढ़ने का असर केवल घर के मासिक बजट तक सीमित नहीं रहने वाला। चाय, कॉफी, लस्सी, दूध से बनने वाली मिठाइयां, खीर, श्रीखंड और अन्य डेयरी उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। खासकर गणेशोत्सव और आने वाले त्योहारों के दौरान मिठाई तथा दुग्ध उत्पादों की मांग बढ़ने से दुकानदार कीमतों में कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल सकते हैं।