Third DFC Dankuni to Gujarat: भारत के माल ढुलाई परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) नेटवर्क के विस्तार की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर के सफल संचालन के बाद अब देश में तीसरे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण की योजना पर काम शुरू हो गया है। केंद्रीय बजट में घोषित यह प्रस्तावित नया मार्ग पश्चिम बंगाल के दानकुनी से शुरू होकर झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र होते हुए गुजरात के प्रमुख बंदरगाहों तक पहुंचेगा।
महाराष्ट्र के औद्योगिक विकास के लिहाज से यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य में इस नए DFC को नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग के समानांतर बिछाने की संभावनाओं पर तकनीकी और रणनीतिक अध्ययन किया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो विदर्भ, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र के औद्योगिक और कृषि केंद्रों को सीधे देश के पूर्वी और पश्चिमी समुद्री बंदरगाहों से तेज, सस्ती और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल जाएगी।
फिलहाल देश में 2,843 किलोमीटर लंबा समर्पित माल ढुलाई नेटवर्क परिचालन में है:
ईस्टर्न DFC (EDFC): पंजाब के न्यू साहनेवाल से बिहार के न्यू सोननगर तक (1,337 किमी)।
वेस्टर्न DFC (WDFC): उत्तर प्रदेश के न्यू दादरी से महाराष्ट्र के न्यू जेएनपीटी (JNPT) तक (1,506 किमी)।
इन कॉरिडोर पर डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनों (Double-Stack Container Trains) के बेधड़क संचालन से बंदरगाहों से भीतरी भागों तक माल पहुंचने के समय में भारी गिरावट आई है।
समर्पित माल ढुलाई मार्ग बन जाने से पारंपरिक पैसेंजर रेल पटरियों पर से मालगाड़ियों का दबाव काफी कम हुआ है। इसका सीधा फायदा यह हुआ है कि यात्री ट्रेनों की गति और समयपालन (Punctuality) में सुधार आया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, समृद्धि महामार्ग के साथ तीसरे DFC का विकास न केवल औद्योगिक गलियारों को गति देगा, बल्कि देश के समग्र लॉजिस्टिक्स खर्च में भी बड़ी कटौती करने में सक्षम साबित होगा।