उद्धव ठाकरे और संजय राउत (फोटो क्रेडिट-X)  
मुंबई

फेल हुआ ठाकरे गुट की घर वापसी का प्लान, व्हिप के बावजूद संसदीय दल की बैठक को बागियों ने दिखाया ठेंगा

Shiv Sena UBT Parliamentary Meeting Fails Rebel MP Defy Whip: शिवसेना यूबीटी की दिल्ली बैठक में नहीं पहुंचे बागी सांसद; व्हिप के उल्लंघन के बाद अयोग्यता की कार्रवाई तय, 'ऑपरेशन टाइगर' सफल।

अनिल सिंह

Shiv Sena UBT Parliamentary Meeting: महाराष्ट्र की सियासत में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को टूटने से बचाने और बागी सांसदों को वापस 'मातोश्री' के पाले में लाने का आखिरी दांव पूरी तरह फेल हो चुका है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 'ऑपरेशन टाइगर' को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे के निर्देश पर जारी किए गए कड़े 'व्हिप' को बागी सांसदों ने पूरी तरह से ठेंगा दिखा दिया है। नई दिल्ली में बुलाई गई शिवसेना यूबीटी के संसदीय दल की आपातकालीन बैठक में एक भी बागी सांसद नहीं पहुंचा।

जिससे यह साफ हो गया है कि अब समझौते के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं और उद्धव सेना में यह महा-विभाजन अब कानूनी रूप से अंतिम मुकाम पर है। इस महत्वपूर्ण बैठक में बागियों की गैर-मौजूदगी के बाद अब तकनीकी रूप से 'ऑपरेशन टाइगर' को सफल माना जा रहा है।

व्हिप के बावजूद बैठक से नदारद रहे 6 सांसद

लोकसभा में उद्धव ठाकरे गुट के कुल 9 सांसद हैं, जिनमें से दो-तिहाई यानी 6 सांसदों ने पहले ही बगावती रुख अपना रखा था। पार्टी द्वारा बुलाई गई इस लिटमस टेस्ट बैठक में केवल वही 3 सांसद मौजूद रहे, जो संकट के इस दौर में भी उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं। बैठक में शामिल होने वाले वफादार सांसदों में अरविंद सावंत, अनिल देसाई और नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे का नाम शामिल है। दूसरी तरफ, बगावत का झंडा बुलंद करने वाले 6 सांसद इस बैठक से पूरी तरह नदारद रहे, जिससे दिल्ली पहुंचे संजय राउत के डैमेज कंट्रोल प्लान को करारा झटका लगा है।

बैठक में शामिल न होने वाले बागी सांसदों की सूची:

एकनाथ शिंदे की शिवसेना में आधिकारिक तौर पर विलय की तैयारी कर रहे और व्हिप का उल्लंघन करने वाले सांसदों की सूची इस प्रकार है।

  • संजय उर्फ बंदू जाधव (सांसद, परभणी)
  • संजय देशमुख
  • ओमराजे निंबालकर (सांसद, धाराशिव)
  • संजय दीना पाटिल (सांसद, उत्तर पूर्वी मुंबई)
  • भाऊसाहेब वकचौरे
  • नागेश पाटिल आष्टीकर

'घर वापसी' का प्लान ध्वस्त, अब बागियों पर चलेगी अयोग्यता की कानूनी तलवार

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस आपात बैठक के पीछे मुख्य रणनीति यह थी कि सांसदों को आखिरी बार समझाकर घर वापसी का मौका दिया जाए और यदि वे नहीं मानते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का आधार तैयार किया जाए। संसदीय नियमों के अनुसार, जब कोई राजनीतिक दल आधिकारिक रूप से व्हिप जारी करके बैठक बुलाता है और कोई सदस्य बिना किसी ठोस या पूर्व अनुमति के उसका उल्लंघन करता है, तो पार्टी उसके खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई कर सकती है। बैठक खत्म होने के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि शिवसेना यूबीटी इन सभी 6 सांसदों को अयोग्य घोषित करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष जल्द ही याचिका दायर करेगी। हालांकि, 6 सांसदों की संख्या दलबदल कानून के तहत दो-तिहाई के आंकड़े को छूती है, इसलिए बागी धड़ा कानूनी रूप से खुद को सुरक्षित मान रहा है।

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