Maharashtra Politics Shiv Sena Symbol Dispute: शिवसेना और धनुष बाण चुनाव चिह्न को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे विवाद के बीच एकनाथ शिंदे अपने ही सहयोगियों के कारण मुश्किलों में घिर सकते हैं। वकील असीम सरोदे के अनुसार, उद्धव ठाकरे या कपिल सिब्बल नहीं, बल्कि तीन मंत्रियों के पुराने हस्ताक्षरों से जुड़े दस्तावेज शिंदे गुट के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन सकते हैं।
सामंत, राठौड़, भुसे के साइन असीम सरोदे ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि शिंदे और उनके साथ गए विधायकों के बाद मुंबई में रुके शिवसेना विधायकों ने उन्हें पार्टी से निलंबित करने का प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव पर उदय सामंत, संजय राठौड़ और दादा भुसे के हस्ताक्षर होने का दावा किया जा रहा है। सरोदे के मुताबिक, इन तीनों नेताओं ने इन हस्ताक्षरों को अपना होने से इनकार नहीं किया है।
सरोदे ने कहा कि इन हस्ताक्षरों वाला प्रस्ताव यह दिखाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकता है कि उस समय पार्टी की ओर से शिंदे के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। उनके अनुसार, इस दस्तावेज में एक प्रस्तावक और दो अनुमोदकों के तौर पर इन नेताओं की भूमिका बताई गई है इसलिए सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा शिंदे गुट के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
पार्टी संविधान पर शिंदे के अपने हस्ताक्षर यो शिवसेना के संविधान में बदलाव से जुड़े दस्तावेजों का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि एकनाथ शिंदे कार्यकारिणी की बैठक में मौजूद थे और संविधान में बदलाव के समय उन्होंने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने कहा कि ये दस्तावेज अदालत के सामने रखे जा चुके हैं और इन्हें नकारना शिंदे गुट के लिए आसान नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई में शिंदे गुट अपनी दलील रखेगा। ऐसे में पुराने हस्ताक्षरों और अन्य दस्तावेजों को लेकर सरोदे द्वारा उठाए गए सवाल सुनवाई के दौरान अहम हो सकते हैं।