Maharashtra MPLAD Fund Sanjay Raut: उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना से बगावत कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने वाले छह सांसदों को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इन सांसदों ने दल-बदल करते वक्त आरोप लगाया था कि उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार की 'सांसद निधि' वेबसाइट से मिले तीन साल के आंकड़ों ने इनके दावों की हवा निकाल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन छह बागी सांसदों ने आवंटित फंड में से सिर्फ 1.07% से लेकर 26.84% हिस्सा ही खर्च किया है।
केंद्र सरकार की तरफ से 'सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना' के तहत स्थानीय जरूरतों और विकास कार्यों के लिए हर सांसद को प्रति वर्ष 5 करोड़ दिए जाते हैं। अगर यह फंड खर्च नहीं होता है, तो बची हुई रकम को अगले वित्त वर्ष में जोड़ दिया जाता है। एमपीलैड्स पोर्टल पर मौजूद आंकड़ों के अनुसार, इन छह बागी सांसदों के खाते में लगभग 100 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध था। लेकिन, पिछले दो वित्तीय वर्षों और इस साल की पहली तिमाही के दौरान इनमें से औसतन लगभग 13.60 करोड़ रुपये ही इस्तेमाल किए गए हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद हिंगोली सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने कहा कि पोर्टल के आंकड़ों को गलत तरीके से समझा जा रहा है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि सांसद के रूप में हमें हर साल 5 करोड़ रुपये मिलते हैं, जो 6 विधानसभाओं वाले एक लोकसभा क्षेत्र के लिए बहुत कम है। जब हमने पहले फंड की कमी की बात की थी, तो हमारा मतलब डीपीटीसी (जिला योजना और विकास समिति) और राज्य सरकार की योजनाओं से था।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राऊत ने बागियों पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आंकड़े साफ दिखाते हैं कि ये सांसद एमपीलैड्स फंड का इस्तेमाल करने में किस तरह नाकाम रहे हैं। 14 करोड़ रुपये का फंड बिना खर्च हुए पड़ा है, आखिर उन्हें यह फंड खर्च करने से किसने रोका था और अब, वह किस फंड के लिए अपना पाला बदल रहे हैं?
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