Maharashtra Industry Row: महाराष्ट्र में बंद हो रहे उद्योगों के मुद्दे को लेकर महासंग्राम छिड़ गया है। राकां अध्यक्ष शरद पवार ने X पर पोस्ट कर राज्य में उद्योग की स्थिति को लेकर महायुति सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने खास तौर से पुणे के चाकण इंडस्ट्रियल एस्टेट की उन 20 कंपनियों का मुद्दा उठाया है। इस क्षेत्र में ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, पानी, बिजली और सड़क की समस्याओं के कारण दूसरी जगह शिफ्ट होने का फैसला किया है। पवार ने कहा कि यह बहुत गंभीर बात है। इन कंपनियों में 2,000 से ज्यादा वर्कर काम कर रहे हैं।
अगर इन कंपनियां ने यहां से अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया तो काफी संख्या में लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इससे पहले संसद के मानसून सेशन के दौरान, राज्य की इंडस्ट्रियल पॉलिसी के बारे में शिवसेना (यूबीटी) के सांसद राजा भाऊ वाजे ने महाराष्ट्र में बंद हो रहे उद्योगों का मुद्दा उठाया था। इस सवाल का जवाब देते हुए कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बताया था कि पिछले 5 सालों में महाराष्ट्र में 36,211 प्राइवेट कंपनियां बंद हो गई हैं। इस मुद्दे को लेकर भी विपक्ष ने महायुति सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।
सीएम ने विपक्ष के चुभते सवालों पर पलटवार करते हुए कहा कि राज्य में बंद हुए उद्योगों की सच्चाई कुछ और है। मेरी विपक्ष से अपील है कि वे इसे लेकर भ्रम न फैलाएं। उन्होंने बताया कि संसद में सम्बंधित मंत्री द्वारा दिए गए बयान का कुछ नए नेताओं ने फायदा उठाया और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।
सीएम ने कहा कि शरद पवार एक समझदार और सीनियर नेता हैं जो हमेशा महाराष्ट्र के फायदे के बारे में सोचते हैं, इसलिए आपके मन में कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। इसलिए मैं उन्हें महाराष्ट्र में उद्योगों की स्थिति को लेकर सही सच्चाई बताना चाहता हूं।
फडणवीस ने कहा कि जहां तक चाकण की बात है। वहां कुछ समस्याएं जरूर हैं, मैंने उद्योग मंत्री उदय सामंत को खास तौर से इसका समाधान निकालने का निर्देश दिया है। एमआईडीसी की पहल पर 12 अगस्त को डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन, पब्लिक ववर्स डिपार्टमेंट, पीएमआरडीए, नेशनल हाईवे अथॉरिटी, डिस्ट्रिक्ट काउंसिल जैसी सभी संबंधित एजेंसियों की मीटिंग हुई है। सीएम ने कहा कि हमारी कोशिश होगी कि महाराष्ट्र से कोई भी इंडस्ट्री बाहर न जाए।
सीएम फडणवीस ने कहा कि पूरे देश में उद्योग के मामले में महाराष्ट्र नंबर 1 पर है और आगे भी रहेगा। उन्होंने बताया कि राज्य में अभी भी सबसे ज्यादा 3,96,211 एक्टिव कंपनियां हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर दिल्ली में 2,72,342 और तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश 1,85,982 कंपनियां एक्टिव है।