भारत के मुख्य न्यायाधीश ने राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्षी शिष्टमंडल से मिलने से किया इनकार।
शिवसेना प्रवक्ता ने इसे विपक्ष के राजनीतिक षड्यंत्र से दूरी बनाने वाला प्रशंसनीय कदम बताया।
निरुपम ने आरोप लगाया कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को ऐसे नेताओं से दूरी रखनी चाहिए।
Sanjay Nirupam On Rahul Gandhi: शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं के शिष्टमंडल से मिलने से भारत के मुख्य न्यायधीश द्वारा इनकार करने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सीजेआई ने विपक्ष के राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा बनने से मनाकर प्रशंसनीय कदम उठाया है।
निरुपम ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लगातार झूठ बोलते हैं और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भी वोट चोरी के फर्जी नैरेटिव में घसीटने का घिनौना प्रयास किया था, इसलिए संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को उनसे दूरी बनानी चाहिए।
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने विपक्षी नेताओं के राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा बनने से मना कर दिया है। निश्चित तौर पर यह बहुत ही प्रशंसनीय कदम है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से आज विपक्षी दलों के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल लेकर मिलने की इच्छा जताई जा रही थी, जिसे मुख्य न्यायाधीश ने मना कर दिया।
उन्होंने कहा कि इसके दो कारण मुझे समझ में आते हैं। पहला यह कि राहुल गांधी लगातार झूठ बोलते रहे हैं, खासकर तब जब वे राष्ट्रपति से मिलकर आते हैं और बाहर आकर कहते हैं कि उनके वोट चोरी वाले फर्जी नैरेटिव से राष्ट्रपति सहमत हैं। यह सरासर झूठ था। यह उनका राष्ट्रपति को अपनी राजनीति के कीचड़ में खींचने की घिनौना कोशिश थी। जिस तरीके से उन्होंने राष्ट्रपति के साथ खिलवाड़ किया, उसे देखते हुए भारत में संवैधानिक पदों पर बैठे सभी लोगों को यह मौका और अधिकार मिल गया है कि राहुल गांधी जैसे झूठ पर आधारित नैरेटिव चलाने वाले व्यक्ति से, चाहे वह किसी भी पद पर हो, नहीं मिलना चाहिए।
शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि चीफ जस्टिस ने जो निर्णय लिया है, उसका एक कारण तो यह दिख रहा है और दूसरा कारण यह है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास जितने भी असंतुष्ट लोग हैं, त्रस्त लोग हैं, जिन्हें कुछ कहना है या सरकार से असहमति जाहिर करनी है या कोई शिकायत दर्ज करनी है तो उसके लिए वे याचिका लेकर सुनवाई करते हैं। अगर मुख्य न्यायाधीश अलग-अलग प्रदर्शनकारियों के शिष्टमंडल से मिलने लगे तो फिर उनकी बेंच का क्या होगा।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के सलाहकारों को और खुद राहुल गांधी को इतनी समझ नहीं है कि संवैधानिक शिष्टाचार क्या होता है। वे अपने नेताओं को यह नहीं समझा पाए कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास शिष्टमंडल लेकर नहीं जाया जाता, उनसे इस तरह नहीं मिला जा सकता, यह शिष्टाचार के विरुद्ध है। मुख्य न्यायाधीश के इनकार के इस फैसले का मैं स्वागत करता हूं।
संजय निरुपम ने कहा कि उन्हें राजनीति से ऊपर रखने की जिम्मेदारी सिर्फ सत्ता पक्ष की नहीं, बल्कि विपक्ष की भी है। इसलिए विपक्ष के इकोसिस्टम में शामिल सभी नेताओं से मैं कहूंगा कि कृपया करके राष्ट्रपति या मुख्य न्यायाधीश को अपनी राजनीति के कीचड़ में मत घसीटिए।
- एजेंसी इनपुट से