मुंबई

2029 तक खत्म हो जाएगी शिवसेना UBT, ऑपरेशन टाइगर के बीच एकनाथ शिंदे गुट के नेता का बड़ा दावा

Sanjay Nirupam Slams Uddhav Thackeray: शिवसेना नेता संजय निरुपम का उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला; कहा- नेताओं के असंतोष के कारण 2029 तक खत्म हो जाएगी पार्टी।

अनिल सिंह

Sanjay Nirupam On Uddhav Thackeray Shiv Sena UBT: महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में कथित 'ऑपरेशन टाइगर' और उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों के पाला बदलने की चर्चाओं के बीच एकनाथ शिंदे की शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने विपक्ष पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। निरुपम ने दावा किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) अंदरूनी तौर पर बेहद कमजोर हो चुकी है और पार्टी के भीतर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का अपनी ही लीडरशिप से भरोसा पूरी तरह उठ गया है।

उन्होंने सत्ताधारी गठबंधन पर लग रहे विधायकों को तोड़ने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। संजय निरुपम ने 'ऑपरेशन टाइगर' की अटकलों पर तंज कसते हुए कहा कि यह पूरी शब्दावली सिर्फ मीडिया द्वारा गढ़ी गई है और महायुति सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

2029 तक पूरी तरह समाप्त हो जाएगा 'उबाठा' का वजूद

संजय निरुपम ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि साल 2029 के आते-आते उद्धव ठाकरे की पार्टी का वजूद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हर बीतते दिन के साथ उद्धव के नेतृत्व से तंग आकर लोग लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं। निरुपम ने तंज कसा कि जो उद्धव ठाकरे हमेशा खुद फेसबुक पर लाइव रहते थे, पहली बार उनसे प्रेरणा लेकर उनके अपने सांसद भी मातोश्री की बैठक में खुद ऑनलाइन लाइव हो गए और शारीरिक रूप से हाजिर नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों के बीच पनपा यह जबरदस्त असंतोष इस बात का साफ प्रमाण है कि आने वाले दिनों में यह पार्टी पूरी तरह बिखरने वाली है।

निरुपम ने गिनाईं आंतरिक कलह की तीन बड़ी वजहें

शिवसेना (यूबीटी) में लगातार बढ़ रही इस अंदरूनी बगावत के पीछे संजय निरुपम ने तीन प्रमुख कारणों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहली वजह यह है कि इस समय 'उबाठा' के शीर्ष नेतृत्व में अत्यधिक अहंकार आ गया है। दूसरी बात, पार्टी का नेतृत्व अपने ही विधायकों और सांसदों के लिए सुलभ नहीं है, जिससे उनसे मिलना भी नामुमकिन हो जाता है। तीसरी और सबसे बड़ी वजह यह है कि इस पार्टी को चलाने वाले दोनों प्रमुख नेता, यानी उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे अपने घर से बाहर कदम ही नहीं निकालते और न ही कभी जमीनी स्तर पर महाराष्ट्र के दौरों पर जाते हैं।

सांसदों की गैरहाजिरी से गरमाई राज्य की राजनीति

इस पूरे विवाद की जड़ रविवार (14 जून 2026) को मुंबई स्थित ठाकरे आवास 'मातोश्री' में बुलाई गई पार्टी के लोकसभा सांसदों की आपात बैठक से जुड़ी है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के कुल 9 सांसदों को अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर केवल 4 सांसद ही वहां उपस्थित हो सके और 5 प्रमुख चेहरे गायब रहे। हालांकि, डैमेज कंट्रोल करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता अरविंद सावंत ने स्पष्टीकरण दिया था कि कुछ सांसद व्यक्तिगत आपातकालीन कारणों से मुंबई नहीं आ पाए थे और वे केवल वर्चुअली (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) इस बैठक से जुड़े थे, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे किसी बड़े सियासी विस्फोट से पहले की शांति मान रहे हैं।

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