Rohit Pawar Statement Students FIR Ultimatum: देश में पेपर लीक और शैक्षिक अनियमितताओं को लेकर जारी घमासान के बीच महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। युवा नेता रोहित पवार ने धर्मेंद्र प्रधान का स्वागत और मुंबई में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पवार ने साफ कहा कि जहां एक ओर ऊपर के आदेश पर स्वागत के ड्रामे हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है।
धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचते ही उनके स्वागत पर तंज कसते हुए रोहित पवार ने इसे अंधभक्तों की मजबूरी बताया। उन्होंने कहा कि जो अंधभक्त हैं, उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। पवार के अनुसार, अंधभक्तों के शिरोमणि यानी उनके शीर्ष नेताओं की ओर से स्पष्ट आदेश आया था कि जब धर्मेंद्र प्रधान आएं, तो उनका भव्य स्वागत किया जाए।
पवार ने आगे कहा कि इस दिखावे से जमीनी हकीकत नहीं बदलती। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों ने अपनी यह लड़ाई खुद के दम और अपनी हिम्मत पर लड़ी है और वे इसमें जीते भी हैं। इस दौरान उन्होंने एक बेहद रोचक जानकारी साझा की कि उडिसा के एक भाजपा मंत्री और एक भाजपा सांसद की बेटियों ने अपनी पारिवारिक विचारधारा से अलग हटकर छात्रों का साथ दिया है। उन्होंने इन युवाओं की हिम्मत की दाद देते हुए उनका अभिनंदन किया।
रोहित पवार ने मुंबई में हुए आंदोलनों के बाद छात्रों पर की गई कानूनी कार्रवाई पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि करीब 1500 से 1800 निर्दोष बच्चों पर FIR दर्ज की गई है। उन्होंने DG और आईजी IG से मुलाकात कर इन मामलों को वापस लेने की विनती की है।
पवार ने विस्तार से बताया कि इन FIR का छात्रों के करियर पर कितना घातक असर पड़ रहा है। इनमें से कई छात्र मात्र 15 से 17 साल के हैं, कई छात्र MNCs में काम कर रहे हैं या इंटरव्यू की तैयारी कर रहे हैं, कइयों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना है या पासपोर्ट बनवाना है, जिसके लिए पुलिस कैरेक्टर सर्टिफिकेट अनिवार्य होता है। FIR होने की वजह से इन होनहार युवाओं को भविष्य में नौकरी और शिक्षा मिलने में भारी दिक्कत आ सकती है।
यह भी पढ़ें: लखनऊ में 90% जगह अवैध है, क्या वहां भी बुलडोजर चलेगा? जौहर यूनिवर्सिटी मामले पर वारिस पठान का तीखा हमला
रोहित पवार ने गृह मंत्री और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को याद दिलाया कि यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं बल्कि एक सामाजिक आंदोलन था, जिसका उद्देश्य छात्रों को न्याय दिलाना था। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के उस वादे का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि बच्चों पर से FIR वापस ली जाएगी।
पवार ने चेतावनी देते हुए कहा कि दिल्ली में छात्र संगठनों ने एकजुट होकर घोषणा की है कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर इन FIR को वापस नहीं लिया गया, तो देशव्यापी स्तर पर एक बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा होगा। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से आग्रह किया कि 18 से 21 तारीख के बीच हुए आंदोलनों के दौरान जिन भी बच्चों पर मामले दर्ज हुए हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।