Rohit Pawar Slams Center: देश के राजनीतिक परिदृश्य में युवाओं का बढ़ता असंतोष अब एक नए और उग्र मोड़ पर आ गया है। हाल ही में सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान जिस तरह से प्रदर्शनकारी युवाओं को संसद तक जाने से रोका गया और उन पर आंसू गैस के गोले बरसाए गए, उसने देश भर के विपक्षी नेताओं को आक्रोशित कर दिया है।
इस दमनकारी कार्रवाई पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार के विधायक और युवा चेहरा रोहित पवार ने सरकार को सीधी चेतावनी दे डाली है।
रोहित पवार ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार के दमनकारी रवैये पर निशाना साधा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में प्रशासन को आगाह करते हुए कहा कि अश्रुगैस के गोले फोड़कर देश की युवा पीढ़ी की आवाज को दबाया नहीं जा सकता, बल्कि प्रशासन की यह कार्रवाई इस आवाज को और भी बुलंद करने का काम करेगी। उनका मानना है कि युवाओं के संघर्ष को बल प्रयोग से खत्म करना संभव नहीं है।
सरकार की कार्यशैली पर सीधा प्रहार करते हुए पवार ने इसे तानाशाही प्रवृत्ति और निष्ठुर करार दिया। उन्होंने एक अत्यंत रोचक और प्रतीकात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासन ने भले ही धुआं आंदोलनकारी युवाओं पर छोड़ा हो, लेकिन इस क्रूर सरकार की आंखों में आंसू आना अब तय है। पवार के इस कटाक्ष का स्पष्ट अर्थ है कि युवाओं पर किया गया यह अत्याचार अंततः सरकार के पतन या भारी राजनीतिक नुकसान का कारण बनेगा। उन्होंने युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश करने वाली केंद्र सरकार का कड़े शब्दों में सार्वजनिक निषेध भी किया है।
अपने विरोध को और अधिक धार देने और युवाओं के जज्बे को सलाम करने के लिए रोहित पवार ने महान शायर फैज अहमद फैज की कालजयी नज्म हम देखेंगे की पंक्तियों का सहारा लिया। इन पंक्तियों के माध्यम से रोहित पवार ने यह संदेश दिया कि जुल्म के पहाड़ चाहे कितने भी भारी क्यों न हों, वे एक दिन रुई की तरह हवा में उड़ जाएंगे और जीत अंततः जनता की ही होगी।
रोहित पवार का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वे युवाओं के मुद्दों पर पीछे हटने वाले नहीं हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पवार का यह 'हम देखेंगे' का उद्घोष न केवल प्रदर्शनकारी युवाओं का मनोबल बढ़ाने वाला है, बल्कि यह सरकार के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को बल प्रयोग के माध्यम से कुचलना असंभव है।
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सीजेपी प्रोटेस्ट को संसद तक जाने से रोकने के लिए पुलिस द्वारा किया गया बल प्रयोग अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। रोहित पवार ने अपने इस बयान से स्पष्ट कर दिया है कि धुआं युवाओं पर, पानी सरकार की आंखों में - यह केवल एक जुमला नहीं, बल्कि आने वाले समय में सरकार के खिलाफ होने वाले तीखे संघर्ष की आहट है। अब देखना यह होगा कि युवा आक्रोश की इस लहर का सरकार किस प्रकार सामना करती है।