Rohit Pawar Slams Bageshwar Baba: महाराष्ट्र की राजनीति में छत्रपति शिवाजी महाराज और संतों के सम्मान का मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है। अब एनसीपी (शरद चंद्र पवार) नेता और विधायक रोहित पवार ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रोहित पवार ने धीरेंद्र शास्त्री को 'भोंदू' और 'पाखंडी' करार देते हुए कड़ी चेतावनी दी है कि महाराष्ट्र के महापुरुषों का अपमान करने वालों को राज्य की जनता करारा जवाब देगी।
रोहित पवार ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि जानबूझकर गलत बयानबाजी करना, झूठा इतिहास बताना और जब जनता का गुस्सा भड़क जाए तो माफी मांग लेना यह एक सोची-समझी प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री पर आरोप लगाया कि वे बार-बार इसी पैटर्न को दोहरा रहे हैं। पवार के अनुसार, यह केवल एक बयान नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की अस्मिता को ठेस पहुँचाने की एक प्रवृत्ति है, जिसका हमेशा विरोध किया जाएगा।
अपने बयान में रोहित पवार ने याद दिलाया कि यह पहली बार नहीं है जब धीरेंद्र शास्त्री ने विवादित टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी शास्त्री ने महान संत तुकाराम महाराज का अपमान किया था। अब उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करके अपनी मानसिकता उजागर की है। पवार ने शास्त्री की माफी को खोखला बताया और कहा कि मीडिया ने वही दिखाया जो उन्होंने बोला था, इसलिए 'बयान को गलत तरीके से पेश करने' का तर्क पूरी तरह निराधार है।
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महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए रोहित पवार ने कहा कि यह संतों की भूमि है और यहाँ संतों के प्रति अटूट आदर है। लेकिन, जो लोग संत होने का मुखौटा पहनकर महापुरुषों का अपमान करते हैं, उनके साथ सख्ती से निपटा जाना चाहिए। उन्होंने संत तुकाराम महाराज की प्रसिद्ध उक्ति "नाठाळाच्या माथी हाणू काठी" अर्थात दुष्ट या टेढ़े व्यक्ति के सिर पर लाठी मारनी चाहिए का हवाला देते हुए संकेत दिया कि यदि ऐसी अपमानजनक टिप्पणियां नहीं रुकीं, तो महाराष्ट्र अपने तरीके से जवाब देगा।रोहित पवार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में चुनाव और राजनीतिक समीकरणों के बीच अस्मिता का मुद्दा सबसे ऊपर है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष को भी घेर रहे हैं कि वे ऐसे 'पाखंडी' बाबाओं के खिलाफ सख्त स्टैंड क्यों नहीं ले रहे हैं।