चांदी का वर्क और तुकाराम मुंढे (सोर्स: डिजाइन फोटो)
मुंबई

चांदी का वर्क असली है या एल्युमिनियम? ऐसे करें शुरुआती पहचान, तुकाराम मुंढे ने बताया तरीका

How To Identify Fake Silver Foil On Sweets: मिठाई पर लगा चांदी का वर्क असली है या एल्युमिनियम फॉयल? जानिए FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे का बताया तरीका, FSSAI के मानक और मिठाई खरीदते समय जरूरी सावधानियां।

गोरक्ष पोफली

Highlights

  • मिठाइयों पर लगे चांदी के वर्क की उंगलियों से जांच करें

  • असली चांदी रगड़ने पर धीरे-धीरे घुलकर आसानी से फैल जाती है

  • एल्युमिनियम फॉयल रगड़ने पर सिकुड़कर एक छोटी सी गांठ बनाती है

FDA Tukaram Mundhe Explains To Identify Fake Silver Foil On Sweets: कभी-कभी लगता है कि इंसान की आंखें भी कहानियों वाले उस कौवे जैसी ही होती हैं, जिसे चमचमाती चीजें देखकर उन्हें अपना बनाने का मन करता था। त्योहारों के सीजन में हम भी कुछ ऐसा ही करते हैं। मिठाई की दुकानों में चांदी के चमचमाते वर्क से सजी मिठाइयां देखते ही उन्हें खरीदने का मन हो जाता है। लेकिन कहीं हमारी यही आदत लेने के देने न डाल दे! इसलिए मिठाइयों पर लगे चांदी के वर्क की शुद्धता जांचना बेहद जरूरी है।

आखिर यह असली चांदी है या सस्ती एल्युमिनियम फॉइल? बिना लैब टेस्ट के इसकी शुरुआती पहचान कैसे की जा सकती है? इसी सवाल का जवाब महाराष्ट्र FDA के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने दिया है। उन्होंने ग्राहकों को वर्क की पहचान करने का एक आसान तरीका बताया है। खास बात यह है कि इसके लिए किसी मशीन या केमिकल की नहीं, बल्कि सिर्फ अपनी उंगलियों की जरूरत है।

उंगलियों के बीच रगड़ें, सामने आ सकता है अंतर

FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के मुताबिक, मिठाई पर लगे वर्क का थोड़ा हिस्सा लेकर उंगलियों के बीच रगड़ें। अगर वह असली चांदी का वर्क है, तो रगड़ने पर धीरे-धीरे घुलकर फैल जाएगा। वहीं, एल्युमिनियम की फॉइल रगड़ने पर सिकुड़कर छोटी-सी गेंद या फॉइल जैसी गांठ बना सकती है।

यही इस तरीके का सबसे अहम संकेत है। हालांकि, इसे शुद्धता जांचने का पक्का प्रमाण न समझें। किसी मिठाई पर लगे वर्क की वास्तविक धातु और गुणवत्ता की पुष्टि लैब में जांच के बाद ही हो सकती है। इसलिए यह तरीका केवल शुरुआती पहचान तक ही सीमित है।

असली चांदी के वर्क की भी तय होती है शुद्धता

मिठाई पर चांदी की परत लगी है, इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी चमकदार सिल्वर फॉइल खाद्य पदार्थों पर इस्तेमाल की जा सकती है। FSSAI ने चांदी के वर्क के लिए स्टैडर्ड्स तय किए हैं।

नियमों के मुताबिक, खाद्य श्रेणी के चांदी के वर्क में चांदी की शुद्धता कम से कम 999/1000 यानी 99.9 प्रतिशत होनी चाहिए। इसकी मोटाई एक समान होनी चाहिए और इसका वजन 2.8 ग्राम प्रति वर्ग मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए।

एक और दिलचस्प बात यह है कि चांदी का वर्क बनाने की प्रक्रिया में किसी भी चरण पर पशु-आधारित सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यानी असली और खाद्य मानकों के अनुरूप चांदी का वर्क केवल उसकी चमक से नहीं, बल्कि उसकी शुद्धता और निर्माण के नियमों से भी पहचाना जाता है।

क्यों चिंता बढ़ाती है एल्युमिनियम फॉइल?

चांदी और एल्युमिनियम दोनों की चमक दूर से एक जैसी लग सकती है। यही वजह है कि ग्राहक कई बार इनके बीच अंतर नहीं कर पाते। लेकिन मिठाई पर चांदी के वर्क के नाम पर एल्युमिनियम इस्तेमाल करना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है।

कम कीमत वाली धातु को चांदी बताकर बेचना ग्राहक को गुमराह कर सकता है। इसलिए FDA ने मिठाई की दुकानों और खाद्य कारोबारियों की जांच में इस तरह की गड़बड़ी पर भी नजर रखी है। ग्राहक को केवल मिठाई की चमक देखकर उसकी गुणवत्ता का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए।

दिवाली से पहले FDA की बड़ी कार्रवाई

महाराष्ट्र FDA ने दिवाली से पहले मिलावट और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों पर कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया। विभाग के मुताबिक, 15 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 के बीच राज्यभर में 3,332 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया।

इस दौरान 1,501 सुधार नोटिस जारी किए गए, 326 लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन निलंबित किए गए और 15 के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों ने 3,864 खाद्य नमूने भी जांच के लिए लिए। इस अभियान में 1,886.44 मीट्रिक टन खाद्य सामग्री जब्त की गई, जिसकी कीमत करीब 44.37 करोड़ रुपये बताई गई।

यह जांच केवल मिठाई की दुकानों तक सीमित नहीं थी। इसमें दूध और खोया, घी, खाद्य तेल, सूखे मेवे, बेकरी उत्पाद, होटल, कैटरिंग सेवाएं और ऑनलाइन खाद्य कारोबार भी शामिल थे।

पहचान का आधारअसली चांदी का वर्कएल्युमिनियम फॉयल
उंगलियों से रगड़ने परफैलकर बिखर सकता हैसिकुड़कर छोटी गांठ बना सकता है
दिखावटचमकदार और पतली परतचमकदार धातु की पतली परत
खाद्य मानककम से कम 99.9% शुद्धताचांदी के वर्क का विकल्प नहीं
पहचान की विश्वसनीयतालैब टेस्ट से पुष्टिलैब टेस्ट से पुष्टि

मिठाई खरीदते समय इन 5 बातों को रखें ध्यान

मिठाई खरीदने से पहले दुकान का FSSAI लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर जांचें। बिल पर भी लाइसेंस नंबर जरूर देखें।

  • जरूरत से ज्यादा चमकीली या असामान्य रंग वाली मिठाई खरीदने से बचें।

  • खट्टी गंध, जरूरत से ज्यादा चिपचिपापन या फफूंद दिखाई देने पर मिठाई न खाएं।

  • खोया, घी और सूखे मेवे जैसी चीजें असामान्य रूप से सस्ती मिल रही हों तो सावधान रहें।

  • दूध और खोया से बनी मिठाइयां कम मात्रा में खरीदें, फ्रिज में रखें और एक-दो दिन में खा लें।

अगर किसी मिठाई या खाद्य पदार्थ में मिलावट का संदेह हो, तो उसका बिल संभालकर रखें और खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करें। महाराष्ट्र FDA की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-22-23365 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

आखिरकार, मिठाई की खूबसूरती उसकी चमक से हो सकती है, लेकिन उसकी गुणवत्ता का फैसला सिर्फ चमक देखकर नहीं किया जा सकता। अगली बार काजू कतली या बर्फी खरीदें, तो स्वाद के साथ उस पर लगे वर्क की शुद्धता का ख्याल भी जरूर रखें।

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