Raj Thackeray On Vote Bank Politics: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने समाज में बढ़ती अंधश्रद्धा और उत्सवप्रियता को लेकर चिंता जताई। प्रबोधनकार ठाकरे की जयंती के अवसर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में धर्म के नाम पर अंधविश्वासों को भी श्रद्धा माना जा रहा है।
उनके अनुसार, जब कोई इन मान्यताओं पर तार्किक सवाल उठाता है तो उसे तुरंत हिंदू-विरोधी करार दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में उन्हें अपने दादा प्रबोधनकार ठाकरे की विशेष रूप से याद आती है।
राज ठाकरे ने कहा कि यदि समाज कुप्रथाओं में फंस रहा है तो राजनेताओं की भूमिका उसे रोकने की होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आज कई राजनेता वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए जहां राजनीतिक लाभ दिखाई देता है, वहीं झुक जाते हैं। ठाकरे ने कहा कि यदि उनके दादा आज जीवित होते तो वे अपनी लेखनी के माध्यम से ऐसी प्रवृत्तियों पर प्रहार करते।
ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र को संतों और समाज सुधारकों के माध्यम से प्रबोधन की दिशा मिली है। उनके मुताबिक इसी तर्कशक्ति ने आधुनिक महाराष्ट्र के निर्माण में भूमिका निभाई है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि समाज में तर्क के आधार पर चीजों को देखने की यह क्षमता कभी खत्म नहीं होनी चाहिए।
राज ठाकरे ने कहा कि समाज में तर्कशील सोच और सवाल पूछने की प्रवृत्ति को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने इसे प्रबोधनकार ठाकरे के विचारों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी विचार, परंपरा या धार्मिक मान्यता को केवल इसलिए स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वह लंबे समय से चली आ रही है।
समाज के विकास के लिए लोगों में सही-गलत को समझने, सवाल उठाने और तथ्यों के आधार पर अपनी राय बनाने की क्षमता जरूरी है। राज ठाकरे ने युवाओं से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे अंधानुकरण से बचें और प्रबोधनकार ठाकरे के सामाजिक सुधार तथा विवेकवादी विचारों को आगे बढ़ाएं।